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टैलेंटेड कर्मचारियों को रोकने के लिए कंपनियां आज़मा रहीं ये तरीक़े

Updated: बुधवार, 6 मार्च 2019 (11:26 IST)
- क्रिस स्टोकल-वॉकर 
 
कर्मचारियों को खु़श रखने के लिए गिफ्ट और कॉर्पोरेट पर्क ही उपाय नहीं हैं। कुछ दूसरे सामान्य उपाय भी ज़्यादा कारगर हो सकते हैं। प्रतिभावान कर्मचारियों को बनाए रखने और नई प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए कंपनियां कई तरह के काम करती हैं।
 
कर्मचारियों के लिए मुफ़्त स्नैक बार, वीकेंड पर बीयर, जिम की मुफ़्त सदस्यता और घूमने-फिरने के लिए लंबी छुट्टियों की पेशकश वग़ैरह इनमें शामिल हैं। कंपनियों के लिए भर्ती बढ़ाना और कर्मचारियों को जोड़े रखना महत्वपूर्ण होता है।
 
लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी में सांगठनिक मनोविज्ञान की प्रोफेसर सुसैन कार्टराइट कहती हैं, "जब नौकरियों के लिए प्रतियोगिता बढ़ती है तो ऐसी चीज़ें बढ़ जाती हैं। जब प्रतियोगिता नहीं रहती तो ये सब ग़ायब हो जाती हैं।"
 
मौजूदा नौकरी बाज़ार श्रमिकों का बाज़ार है। लोग पहले की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से नौकरियां बदल रहे हैं। अमेरिकी श्रमिक सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़े दिखाते हैं कि 25 से 34 साल के लोग किसी एक नौकरी में औसत रूप से 2.9 साल ही टिक रहे हैं। 1983 में औसत कार्यकाल 3.2 साल का था।
 
कर्मचारियों को जोड़े रखने के लिए कंपनियां कई तरह के लाभ का लालच देती हैं। कई कंपनियां प्रोत्साहन भत्ते देती हैं। लेकिन, कौन सा उपाय काम करता है और कौन सा नहीं करता? अगर कोई भत्ता या सुविधा सिर्फ़ दिखावटी है तो बेहतर विकल्प क्या हैं?
 
लंबी छुट्टी
नेटफ्लिक्स और वर्जिन समूह समेत कई बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों को असीमित छुट्टियों का विकल्प देती हैं। इन कंपनियों के कर्मचारी जितनी लंबी छुट्टी चाहें, वे ले सकते हैं। बड़ी कंपनियों की देखा-देखी छोटी कंपनियां भी इसमें आगे आ रही हैं।
 
अमेरिका के एचआर संगठन सोसाइटी फ़ॉर ह्यूमैन रिसोर्स (SHRM) के मुताबिक़ 5 फ़ीसदी कंपनियां असीमित छुट्टियों की पेशकश कर रही हैं। 2014 में सिर्फ़ 1 फ़ीसदी कंपनियां ऐसी पेशकश करती थीं। ऐसी छुट्टियां कई तरीक़ों से कर्मचारियों का आत्मविश्वास बढ़ाती हैं।
 
एसएचआरएम की सुजैन गाउल्डेन कहती हैं, "कर्मचारियों को अच्छा लगता है कि उन्हें अपनी छुट्टियों की ज़रूरत तय करने की आज़ादी दी जाती है।" लेकिन इसका असर संदिग्ध है। मैनचेस्टर बिज़नेस स्कूल में सांगठनिक मनोविज्ञान के प्रोफेसर कैरी कूपर का कहना है कि पीआर के नज़रिये से यह शानदार है, लेकिन हम नहीं जानते कि लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।
 
छुट्टी नहीं लेते कर्मचारी
छुट्टी लेना बिज़नेस और श्रमिक, दोनों के लिए फ़ायदेमंद है। 2015 के एक अध्ययन में पाया गया था कि जो कर्मचारी अपनी सभी अनिवार्य छुट्टियां लेते हैं उनकी तरक़्क़ी और सालाना 6.5 फ़ीसदी वेतन बढ़ोतरी की संभावना रहती है।
 
जो कर्मचारी अपनी छुट्टियां छोड़ देते हैं उनकी संभावना कम रहती है। लेकिन मनुष्य के रूप में हम नियमों को मानते हैं और ज़रूरत से ज़्यादा छुट्टियां लेने से हमारी बेचैनी बढ़ जाती है।
 
कूपर कहते हैं, "आप जानते हैं कि जब आपसे चार या पांच हफ़्ते की छुट्टी लेने को कहा जाता है तो क्या होता है।" छुट्टियों के बारे में अलग-अलग प्रबंधकों की अलग सोच होती है और कर्मचारी उसे समझ नहीं सकते।...ब्रिटेन में केवल 40 फ़ीसदी कर्मचारी ही अपनी पूरी छुट्टियां ले पाते हैं। ऐसे में नियमों को हटाने से मुश्किल हो सकती है।
 
ज़रूरत है तो छुट्टी लें
कंपनी में पूरे कर्मचारी हों और किसी के छुट्टी लेने पर कोई समस्या न हो, ऐसे हालात उस स्थिति से अच्छे हैं जिसमें छुट्टी लेने का हक तो सभी को है लेकिन वे छुट्टी ले नहीं पाते। जहां तक असीमित छुट्टियों का सवाल है तो इसे धीरे-धीरे लागू करें और सभी स्तरों पर लोग छुट्टी लें, इस बारे में उनको प्रोत्साहित करें।
 
गाउल्डेन कहती हैं, "इस तरह की पहल करने वाले संगठन बार-बार यह संदेश दुहराते रहें कि कर्मचारी वह छुट्टी ज़रूर लें जिसकी उनको ज़रूरत है।"
 
कुछ कंपनियां असीमित छुट्टियों की भावना को बरक़रार रखते हुए इनको औपचारिक शक्ल देने में कामयाब रही हैं। ब्रिटेन की सुपरमार्केट चेन आस्दा ने सभी उम्र के कर्मचारियों के लिए "करियर ब्रेक" योजना बनाई है। इसमें घूमने-फिरने के शौक़ीन युवाओं से लेकर नाती-पोते खिलाने के लिए 60 साल के बुजुर्गों तक को छुट्टी मिलती है।
 
सुविधा या दिखावा
कर्मचारियों के लिए शुक्रवार की रात को मुफ़्त बीयर देना भी ट्रेंड बन रहा है। लेकिन यह उन्हें बहुत पसंद नहीं आ रहा। 'पर्कबॉक्स' नाम की कंपनी ने 2,300 से ज़्यादा लोगों का सर्वे किया कि उनको क्या पर्क मिलता है और उसके बारे में वे क्या सोचते हैं।
 
पर्कबॉक्स के सीईओ सौरव चोपड़ा कहते हैं, "कुछ चीज़ें जिनको आप ट्रेंडी समझते हैं वे सब लोगों की चाहत की लिस्ट में टॉप पर नहीं थीं।" शुक्रवार को मुफ़्त अल्कोहल ड्रिंक पर्कबॉक्स की लिस्ट में 38वें नंबर पर रही।
 
कार्टराइट कहती हैं, "इनमें से कई फ़ायदे टिक नहीं सकते। कई बनावटी हैं और लोग उनको पसंद नहीं करते।" शाम को देर तक ऑफ़िस में रुकने वालों के लिए मुफ़्त के खाने के बारे में भी प्रोफेसर कैरी कूपर ऐसा ही सोचते हैं। वह कहते हैं, "नियोक्ता को लगता है कि वे कर्मचारी की भलाई के लिए यह सुविधा दे रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ़ आप ज़्यादा घंटे तक ऑफ़िस में रुकने की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं।"
दफ़्तर घर नहीं हो सकते
जिन दफ़्तरों में आपसी बातचीत और मुलाक़ातें कम होती हैं और टर्नओवर ज़्यादा होता है, वहां स्टाफ़ की वफ़ादारी बढ़ाने में ये अहम रोल निभा सकते हैं। लेकिन कार्टराइट का कहना है कि कर्मचारियों के लिए ऑफ़िस को घर जैसा बनाने से अच्छा है कि उनको घर से ऑफ़िस का काम करने दें। जिन लोगों को इस लचीले वातावरण में काम करने का मौक़ा मिलता है, वे ज़्यादा समय तक काम में लगे रहते हैं और नियोक्ता के प्रति आभारी भी रहते हैं।
 
कूपर कहते हैं, "इस बात के सबूत हैं कि अगर आप दफ़्तर और घर से काम करने में लचीलापन चाहते हैं और ऐसा करते भी हैं तो आप ज़्यादा उत्पादक होंगे और काम से संतुष्ट भी होंगे।" लेकिन यह सिर्फ़ उन संगठनों में हो सकता है जो इसके प्रति समर्पित हैं, वहां नहीं जो सिर्फ़ दिखावे के लिए ऐसा करते हैं।
 
काम में लचीलापन
जून 2014 में डेलॉयट ने "ऐजाइल वर्किंग" प्रोग्राम की शुरुआत की और ब्रिटेन में कर्मचारियों को यह तय करने का अधिकार दिया कि वे कब और कहां से काम करें। कंपनी ने हाल ही में बताया है कि ऑफ़िस स्पेस और नए कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर होने वाले ख़र्च में उसे 20 करोड़ पाउंड (25.8 करोड़ डॉलर) की बचत हुई है।
 
सप्ताह में चार दिन काम करने के भी फ़ायदे हैं। ब्रिटेन में साइंस रिसर्च फाउंडेशन दी वेलकम ट्रस्ट इस साल से इसका ट्रायल करने की सोच रही है। 2018 में न्यूजीलैंड में ऐसा एक ट्रायल हुआ था जिससे पता चला कि सप्ताह में काम के एक दिन को कम करने से काम की गुणवत्ता या आउटपुट में कोई कमी नहीं आई, जबकि कर्मचारियों के तनाव का स्तर बहुत घट गया। 2018 के एसएचआरम सर्वे के 12 फीसदी उत्तरदाताओं ने बताया था कि वे चार दिन का कार्य सप्ताह चाहते हैं।
 
सेहतमंद रहिए
कॉरपोरेट वेलनेस को अक्सर मेडिटेशन रूम, मसाज या हेयर कट जैसी सुविधाओं के साथ जोड़ दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये सारी सुविधाएं कर्मचारियों को शारीरिक रूप से सेहतमंद रखने जितनी महत्वपूर्ण नहीं हैं।
 
कार्टराइट ने ब्रिटेन के सरकारी विभाग में कर्मचारियों के लिए व्यायाम कार्यक्रम, तनाव प्रबंधन शिक्षा और संज्ञानात्मक चिकित्सा के प्रभाव की तुलना के बारे में एक प्रयोग किया था। वह कहती हैं, "व्यायाम से अन्य दो की तुलना में तुरंत और लंबे समय तक फ़ायदा होता है।"
 
उनके निष्कर्षों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि क्यों 38 फीदी नियोक्ता अपनी कंपनियों में फ़िटनेस प्रतियोगिताएं आयोजित कराते हैं और कर्मचारियों को उसमें हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। पिछले 5 साल में कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य योजनाओं के प्रसार में भी 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, अच्छी सेहत का मतलब सिर्फ हेल्थकेयर कवर होना नहीं है।
 
सेहत खुशहाली की चाबी
कर्मचारियों को जिम की सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनियों को लगता है कि सेहतमंद कर्मचारी ही खुशहाल हो सकता है। गाउल्डेन कहती हैं, "पिछले करीब एक दशक से नियोक्ता अपने कर्मचारियों की खुशहाली और उनके कल्याण के प्रति रुचि दिखा रहे हैं।" इसे मूलभूत सुविधा के तौर पर देखा जाने लगा है।
 
कंपनी जब कार्य और जीवन के बीच अच्छा संतुलन बनाने की कोशिश करती है तो इससे कर्मचारियों की सेहत भी अच्छी हो सकती है। छोटे-छोटे उपायों से ऐसा किया जा सकता है, जैसे ऑफिस से दूर फ़िटनेस क्लासेज़ पर सब्सिडी देकर। एसएजआरम के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में यह तीन गुना बढ़ा है।
 
दिन भर के काम के बीच कसरत करने के लिए लोगों को समय निकालने का मौक़ा देने के भी फ़ायदे हो सकते हैं। कूपर का कहना है कि कर्मचारियों को जिम की सदस्यता देना और हफ्ते में 2-3 बार लंच टाइम में वहां जाने के लिए प्रोत्साहित करने का विचार भी अच्छा है।
 
इससे न सिर्फ़ वे फ़िट रहते हैं, बल्कि उनको दफ्तर से बाहर जाने का मौक़ा भी मिलता है। फ़िटनेस के अलावा दूसरे उपाय भी किए जा सकते हैं। जैसे- वीकेंड में ऑफ़िस के ईमेल तक पहुंच सीमित कर देने से भी दिमागी थकान कम हो सकती है और प्रदर्शन सुधर सकता है। ख़ुशहाल और सेहतमंद कर्मचारियों के टिके रहने की अधिक संभावना रहती है।

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