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क्या आर्य भारत के मूल निवासी नहीं हैं?
हाल ही में द हिंदू में प्रकाशित एक लेख में टोनी जोसेफ़ ने नई जेनेटिक शोध के माध्यम से यह सिद्ध करने का प्रयास किया है ... -
अथातो ब्रह्म जिज्ञासा
अथातो ब्रह्म जिज्ञासा : बादरायण का ब्रह्मसूत्र इस अत्यंत सुंदर और अर्थगर्भी वाक्य से प्रारंभ होता है। आओ, अब हम परम ... -
अधूरीआजादी अखंड भारत के बारे में हर पहलू से एक विचार
भगवा रंग में अखंड भारत का नक़्शा था, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश ही नहीं, श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल, भूटान, ... -
नेहरू की वो तीन ग़लतियां जिन्होंने चीन से दिलाई हार
1947-48 में जब आज़ाद हिंदुस्तान का संविधान बनाया जा रहा था, तभी चीन में 1949 की क्रांति हो गई और हुक़ूमत को माओत्से ... -
पद्मावती : एक "ज़ख़्मी सभ्यता" के मनोजगत में निहित अतीत के प्रेत
अगर सिनेमा यक़ीन दिलाने की कला है तो परदे पर दिखाए जा रहे दृश्य के प्रति इस कलारूप का यह अलिखित आग्रह हमेशा रहता है कि ... -
रूसी क्रांति के सौ साल : एक महास्वप्न का अंत
उन्नीस सौ सत्रह में जब रूस में अक्तूबर क्रांति हुई, तब रूस एक सामंती मुल्क हुआ करता था, वो एक फ़्यूडल स्टेट था। ... -
ठिठक गई ठुमरी की तान
ठुमरी का दूसरा नाम है "गिरिजा देवी" और गिरिजा देवी अपने पीछे एक ऐसा निर्वात छोड़ गई हैं, जिसे कभी पूरा नहीं जा सकेगा.... -
लता मंगेशकर : स्वर बेल थरथराई खिल गए फूल होंठों पर
कुमार गंधर्व ने एक लता-संस्मरण लिखा है। बरसों पुरानी बात है। वे बीमार थे। वैसी ही दशा में उन्होंने रेडियो लगाया। ... -
लता के स्वर की कोई संध्यावेला नहीं हो सकती
लता मंगेशकर को सुनकर उसी शुद्ध स्वर का विचार आता है। वे नादरूपा हैं। स्वर स्वरूपा हैं। लता को व्यक्ति की तरह नहीं, ... -
राजदीप बनाम अर्नब के बरअक़्स सत्य बनाम छद्म
पत्रकारिता चरित्र से ही "सत्यान्वेषी" होती है! सच की तलाश करती है। तर्कणा की सुविधा का तक़ाज़ा है कि "सत्य" और "तथ्य" ... -
"दो क़दम और सही" : राहत इंदौरी की नुमाइंदा शायरी का ज़रूरी गुलदस्ता
डॉ. राहत इंदौरी की नुमाइंदा शायरी के एक संकलन की ज़रूरत बहुत दिनों से अनुभव की जा रही थी। राहत की तीन उर्दू पुस्तकें और ... -
विदावेला में विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद की संपूर्ण ग्रंथावली दस खंडों में प्रकाशित हुई है। इसमें पांचवें खंड से प्रारंभ करके नौवें खंड तक पांच ... -
डिजिटल दौर में ई-पुस्तकों का नया चलन
पहले जब युवा और उत्साही फ़िल्मकार या सिंगर, डांसर, मिमिक्री आर्टिस्ट आदि इंडस्ट्री में काम करना चाहते थे तो वे मुंबई ... -
जब नसीर को दिलीप कुमार ने कहा : बरख़ुरदार, फ़िल्मों से दूर ही रहो!
नसीरुद्दीन शाह की पहली फिल्म "निशान्त" नहीं थी। उनकी पहली फिल्म थी "अमन", जो "निशान्त" से पूरे आठ साल पहले (1967 ... -
राष्ट्रवाद की दुखती रग पर राहुल गांधी का हाथ : भाग 2
जब राहुल गांधी कहते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश का संविधान बदलना चाहता है, तो वे केंद्र सरकार की एक ऐसी दुखती रग ... -
गुलज़ार : ऐ शाइर, क्या ही रंज है के तुम मशहूर हो!
गुलज़ार की कविता का लुत्फ़ उठाने के लिए इस 'परसोनिफ़िकेशन" को, चीज़ों की इस परस्पर "सादृश्यता" को समझना बेहद ज़रूरी है, ... -
राष्ट्रवाद की दुखती रग पर राहुल गांधी का हाथ : भाग 1
गुरुवार को राहुल ने दो बातें कहीं। एक तरफ़ उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश का संविधान बदलना चाहता है। ... -
आग, पानी और धरती का कवि
चंद्रकांत देवताले के एक कविता संकलन का शीर्षक ही है : आग हर चीज़ में बताई गई थी। उनकी एक अन्य कविता है : पैदा हुआ जिस ... -
अलविदा चंद्रकांत देवताले
हमारा जीवन अनेक प्रकार के चाहे-अनचाहे "मानवद्रोहों" से मिलकर बनता है, ये और बात है कि शायद हम हमेशा उसके बारे में बात ... -
बच्चों की लाशों पर सियासत करने की हवस
मुझे आश्चर्य हो रहा है कि गोरखपुर में हुई त्रासदी के लिए एक स्वर से योगी आदित्यनाथ को दोषी ठहराया जा रहा है! किसी भी ...
