Hanuman Chalisa

सर्वदा लाभदायक है मयूरेश स्तोत्र पाठ...

भगवान शिव के पुत्र गणेशजी का मयूरेश स्तोत्र तुरंत असरकारी माना गया है।

इसका पाठ किसी भी चतुर्थी पर फलदायी है लेकिन अंगारक चतुर्थी पर इसे पढ़ने से फल सहस्त्र गुना बढ़ जाता है। राजा इंद्र ने मयूरेश स्तोत्र से गणेशजी को प्रसन्न कर विघ्नों पर विजय प्राप्त की थी। 
 
मयूरेश स्त्रोतम् ब्रह्ममोवाच 
 
- 'पुराण पुरुषं देवं नाना क्रीड़ाकरं मुदाम। 
मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 
परात्परं चिदानंद निर्विकारं ह्रदि स्थितम् ।
गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम्।। 
सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया। 
सर्वविघ्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम्।। 
नानादैव्या निहन्तारं नानारूपाणि विभ्रतम। 
नानायुधधरं भवत्वा मयूरेशं नमाम्यहम्।। 
सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरूपधरे विभुम्। 
सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम्।। 
पार्वतीनंदनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम्। 
भक्तानन्दाकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम्। 
मुनिध्येयं मुनिनुतं मुनिकामप्रपूरकम। 
समष्टिव्यष्टि रूपं त्वां मयूरेशं नमाम्यहम्।। 
सर्वज्ञाननिहन्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम्। 
सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम्।। 
अनेककोटिब्रह्मांण्ड नायकं जगदीश्वरम्। 
अनंत विभवं विष्णुं मयूरेशं नमाम्यहम्।। 
 
मयूरेश उवाच 
 
इदं ब्रह्मकरं स्तोत्रं सर्व पापप्रनाशनम्। 
सर्वकामप्रदं नृणां सर्वोपद्रवनाशनम्।। 
कारागृह गतानां च मोचनं दिनसप्तकात्। 
आधिव्याधिहरं चैव मुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम्।।

ALSO READ: भगवान गणपति 12 पावन नाम (पढ़ें अर्थसहित)

Show comments

शुक्र का सिंह राशि में गोचर, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जरूर करें ये 3 उपाय

क्या धरती से टकराएगा विशालकाय उल्कापिंड? जानें कब सच हो सकती है यह भविष्यवाणी

राहु-गुरु का षडाष्टक योग बना, जानें 12 राशियों पर कैसा पड़ेगा असर

Vakri Budh 2026: बुध की वक्री चाल से बदलेगी 12 राशियों की किस्मत, जानें आपका हाल

त्रिग्रही योग योग से 3 राशियों को होगा लाभ ही लाभ, मौका न चुकें 3 उपाय करें

सभी देखें

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (03 जुलाई, 2026)

03 July Birthday: आपको 3 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 3 जुलाई 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

विघ्नहर्ता दूर करेंगे हर संकट: जानें आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का महत्व, पूजा मुहूर्त, विधि और मंत्र

कब है शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का पर्व?

अगला लेख