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शनिवार को 5 कार्य करेंगे तो होंगे 5 चमत्कारिक फायदे

शुक्रवार,अप्रैल 16, 2021
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आपने पारस मणि, नागमणि, कौस्तुभ मणि, चंद्रकांता मणि, नीलमणि, स्यमंतक मणि, स्फटिक मणि आदि का नाम तो सुना ही होगा, परंतु ही यहां निम्नलिखित नौ मणियों की बात कर रहे हैं- घृत मणि, तैल मणि, भीष्मक मणि, उपलक मणि, स्फटिक मणि, पारस मणि, उलूक मणि, लाजावर्त ...
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हिंदू धर्म में सूर्य देव की उपासना की जाती है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य एक ग्रह के रूप में जाना जाता हैं और सभी ग्रहों में सूर्य देव श्रेष्ठ माने जाते हैं।
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नवग्रहों में गुरु या बृहस्पति ग्रह को ही सर्वश्रेष्ठ ग्रह क्यों माना जाता है। गुरु की राशि धनु और मीन है। गुरुवार इनका दिन है। गुरुवार की प्रकृति क्षिप्र है। यह दिन ब्रह्मा और बृहस्पति का दिन माना गया है। गुरु के सूर्य, मंगल, चंद्र मित्र ग्रह हैं, ...
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सबसे पहले सूर्य का आह्वान किया जाता है क्योंकि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। रोली से रंगे हुए लाल अक्षत और लाल रंग के पुष्प लेकर निम्न मंत्र से सूर्य का आह्वान करें -
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जैसे चंद्रमा का और सूर्य का प्रभाव पड़ता है उसी तरह प्रत्येक ग्रह का धरती पर कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ असर या प्रभाव पड़ता है। चंद्र और सूर्य का प्रभाव तो हमें प्रत्येक्ष दिखाई देता है परंतु अन्य ग्रहों का प्रभाव नहीं दिखाई देता। चंद्रमा के कारण धरती ...
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अधिकतर लोग शनि भगवान से डरते हैं इसी कारण वे उनके मंदिर में उनकी आराधना करने जाते हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने शनिदेव और हनुमानजी दोनों को ही साध रखा है। आओ जानते हैं कि शनिदेव की वक्री दृष्टि किस राशि पर पड़ती है और क्या है बचने के उपाय।
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शनिवार को काले कुत्ते, काली गाय को रोटी, काली चिंटी और काली चिड़िया को दाने डालने से जीवन की रुकावटें दूर होती है।
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जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रूप में देने वाला होता है, तो वह कुछ संकेत पहले से ही देने लगता है। इनके उपाय करके बढ़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
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बृहस्पति ग्रह का वार गुरुवार है। हिन्दू धर्म में नवग्रह में बृहस्पति ग्रह और वारों में गुरुवार को श्रेष्ठ माना है। आखिर बृहस्पति ग्रह को नवग्रों में श्रेष्ठ क्यों माना जाता है। आओ जानते हैं इस संबंध में खास जानकारी।
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ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह की परिभाषा अलग है। भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है सूर्य के बारे में रोचक जानकारी...
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हमारे शरीर में कुछ विशेष स्थान पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है। यदि वह खराब हो या कि उसे खराब कर लिया गया हो तो हर ग्रह व्यक्ति को कुछ न कुछ बीमारी जरूर देता है। पहने हमने बताया था कि कौनसा ग्रह कैसी बीमारी देता है और अब जानिए कि दो ग्रहों की युति से ...
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अंगुलियों के नीचे ग्रहों के पर्वत होते हैं। इन पर्वतों की स्थिति को जानकर आप तय कर सकते हैं कि आपका कौनसा ग्रह कमजोर और कौनसा ग्रह बलवाल है। इसके अनुसार ही उपाय करेंगे तो बेहतर होगा। यहां प्रस्तुत है संक्षिप्त जानकारी।
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शुक्र शुभ ग्रह होकर भोग और विलास का कारक ग्रह है और बिगड़ा हुआ शुक्र जातक का जीवन ही व्यर्थ सिद्ध करता है, क्योंकि मनुष्य का जन्म ही कर्मों के फल भोगने हेतु होता है। अत: अगर आप भी शुक्र के अशुभ फल से परेशान हैं तो आजमाएं शुक्र ग्रह की शांति के 4 ...
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इन मंत्रों के सर्वोत्तम फल प्राप्ति के लिए इनका जाप नियमित रूप से करना चाहिए। अनुशासन तथा पूर्ण शुद्धता का पालन करते हुए नवग्रहों के किसी भी
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हमारे पौराणिक शास्त्रों में मंगल के मंगलकारी और कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन किया गया है। इतना ही नहीं, मंगल के स्वभाव को उजागर करने वाले 21 नामों का भी उल्लेख किया गया है।
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पुराण कहते हैं कि शनि को परमशक्ति परमपिता परमात्मा ने तीनों लोक का न्यायाधीश नियुक्त किया है। शनिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश को भी उनके किए की सजा देते हैं और ब्रह्मांड में स्थित तमाम अन्यों को भी शनि के कोप का शिकार होना पड़ता है। परंतु यह भी सच है ...
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जिनकी कुंडली में शुक्र शुभ स्थिति में नहीं होता उन्हें वि‍परीत फल देता है या फिर फल में कमी के चलते जातक शुक्र संबंधी सुख के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इस समय सौंदर्य भी कम होता जाता है।
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आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आप ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ फल को कुछ खाकर शुभ फल में बदल सकते हैं। क्या सचमुच ऐसा हो सकता है? हां लेकिन इसके लिए आपको पहले यह देखना होगा कि कौनसा ग्रह आपके लिए शुभ और कौनसा ग्रह अशुभ फल दे रहा है और यह भी कि कितनी मात्रा ...
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भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चन्द्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, राहु और केतु। ज्योतिष के अनुसार ग्रह की परिभाषा अलग है। यहां पढ़ें नवग्रहों के पौराणिक स्वरूप के बारे में रोचक जानकारी...
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