0

विष्कुम्भ योग में ना करें कोई भी शुभ कार्य, वर्ना पछताएंगे

मंगलवार,अप्रैल 13, 2021
0
1
वर्ष 2021 में गणगौर व्रत 15 अप्रैल को है। गणगौर लोकपर्व होने के साथ-साथ रंगबिरंगी संस्कृति का अनूठा उत्सव है। चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जानेवाला यह पर्व विशेष तौर पर केवल महिलाओं के लिए ही होता है।
1
2
देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश / घट की स्थापना की जाती है। घट स्थापना करना अर्थात नवरात्रि की कालावधि में ब्रह्मांड में कार्यरत शक्ति तत्व का घट में आवाहन कर उसे कार्यरत करना।
2
3
जहां आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस दिन को उगादि तो महाराष्ट्र में इसे ग़ुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाती है। आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
3
4
इस साल शक्ति की उपासना का ये पर्व यानी चैत्र नवरात्रि मंगलवार, 13 अप्रैल 2021 से शुरू हैं। 21 अप्रैल तक ये पर्व चलेगा। नवरात्रि के आरंभ के साथ ही हिन्दू नववर्ष-2021 की शुरुआत भी होगी। इस बार का महिसासुर मर्दिनी का आगमन दुराचारी,राक्षसी प्रवृत्ति के ...
4
4
5
जहां आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस दिन को उगादि तो महाराष्ट्र में इसे ग़ुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाती है। आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
5
6
इस माह की दिनांक 13 अप्रैल, दिन मंगलवार से चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने जा रही है। हमारे सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। हिन्दू वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ, मासों में 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है ...
6
7
आपकी सभी संतान व सभी भक्त सुखी हों। इसी कामना से मैं इस नवरात्रि में आपकी आराधना कर रहा हूं। हे मां! हमको इस महामारी की घोर विपदा से बचा हमारे कष्टों का हरण कर। इसी मनोरथ से आराधना कर मां के घट की स्थापना करें।
7
8
नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को घट या कलश स्थापना से की जानी चाहिए। कलश को गंगा जल से भरना चाहिए और उसमें पंच रत्न और पंच पल्लव (आम के पत्ते) डालने चाहिए। पहले दिन उत्तम विधि से किया हुआ पूजन मनुष्यों की अभिलाषा पूर्ण करने वाला होता है।
8
8
9
नवरात्रि एक हिन्दू पर्व है। इस पर्व की श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चन्द्रघंटा, श्री कूष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी, श्री सिद्धिदात्री- ये 9 देवियां हैं। नवरात्रि में दुर्गा की घटस्थापना या कलश ...
9
10
गुड़ी पड़वा के दिन लोग अपने घरों की विशेष साफ-सफाई करने के बाद घरों में रंगोली बनाते हैं। आम के पत्तों से बंदनवार बनाकर सभी घरों के आगे लगाते हैं। महिलाएं घरों के बाहर सुदंर और आकर्षक गुड़ी लगाती हैं।
10
11
हिन्दू कैलेंडर सौरमास, चंद्रमास, नक्षत्रमास, सावनमास आदि में से चंद्र मास के अनुसार हिन्दू नववर्ष चैत्र माह से प्रारंभ होता है। चैत्र माह में ही प्रतिपदा से वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। इसी दिन से नवरात्रि भी प्रारंभ होती है। आओ जानते हैं कि चैत्र ...
11
12
नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा करने का अधिक महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक वर्ष में जब भी नवरात्रि आते हैं, देवी दुर्गा मां विभिन्न वाहनों पर सवार होकर आती हैं। इस बार 13 अप्रैल, मंगलवार से माता की आराधना का यह पर्व आरंभ हो जाएगा... ...
12
13
आनंद नामकीय संवत्सर 2078 के प्रारंभ होते ही निम्न मंत्रिमंडल अपना कार्यभार लेकर विश्व का संचालन प्रारंभ करेगा, जो निम्न प्रकार से होगा-
13
14
गुड़ी पड़वा पर मुख्य रूप से 6 शुभ और मंगलकारी काम किए जाते हैं....
14
15
हिन्दू कैलेंडर का प्रथम माह है चैत्र और अंतिम है फाल्गुन। दोनों ही माह वसंत ऋतु में आते हैं। चैत्र की प्रतिपदा तिथि से ही हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है। ईरान में इस तिथि को 'नौरोज' यानी 'नया वर्ष' मनाया जाता है। आंध्र में यह पर्व 'उगादिनाम' से ...
15
16
चैत्र महीने के पहले दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है, जब किसान रबी फसलों को काटते हैं और इसे हिंदू नव वर्ष की शुरुआत मानते हैं। यह दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के नाम से भी काफी लोकप्रिय है।
16
17
देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार माह नवरात्र के लिए निश्चित हैं। वर्ष के प्रथम महीने अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है जिसे चैत्र नवरात्रि या बड़ी नवरात्रि कहते हैं। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि होती है जिसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। ...
17
18
आज आपका दिन मंगलमयी रहे, यही शुभकामना है। 'वेबदुनिया' प्रस्तुत कर रही है खास आपके लिए सप्ताह के 7 दिन के विशिष्ट मुहूर्त। अगर आप इन 7 दिनों में वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं या
18
19
इस वर्ष 2021 की पहली अमावस्या 2 दिन पड़ रही है। पहली अमावस्या 11 अप्रैल को चैत्र श्राद्धादि की मनाई जाएगी, इस दिन पितरों का श्राद्ध एवं तर्पण करने की मान्यता है तथा इसके साथ ही 12 अप्रैल
19