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महाशिवरात्रि पर ये 7 गलतियां की तो होगा बड़ा नुकसान, नहीं मिलेगा शिव का वरदान

गुरुवार,फ़रवरी 20, 2020
shiv puja
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पेश है घर पर ही महाशिवरात्रि पूजन की अत्यंत आसान विधि। यह पूजन विधि जितनी आसान है उतनी ही फलदायी भी। भगवान शिव अत्यंत सरल स्वभाव के देवता माने गए हैं अत: उन्हें सरलतम तरीकों से ही प्रसन्न किया जा सकता है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है।
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इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग इसे महत्वपूर्ण बना रहा है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार 21 फरवरी 2020 पर महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा।
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महाशिवरात्रि पर्व की तिथि को लेकर कुछ लोग संशय में हैं। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की सही तिथि क्या है?
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शिवपुराण में कार्य, बात, व्यवहार और सोच द्वारा किए गए 12 पाप वर्णित हैं जिसे भगवान शिव कभी क्षमा नहीं करते। ऐसा व्यक्ति हमेशा ही शिव के कोप का भाजन होगा और कभी भी सुखी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता।
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प्रदोष को प्रदोष कहने के पीछे एक कथा जुड़ी हुई है। संक्षेप में यह कि चंद्र को क्षय रोग था, जिसके चलते उन्हें मृत्युतुल्य कष्टों हो रहा था। भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें त्रयोदशी के दिन पुन:जीवन प्रदान किया था अत: इसीलिए इस दिन को प्रदोष ...
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प्रदोष माह में दो बार यानी शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष की बारस अथवा तेरस को आता है। प्रदोष का व्रत एवं उपवास भगवान सदाशिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। प्रदोष काल में स्नान करके मौन रहना चाहिए, क्योंकि शिवकर्म सदैव मौन रहकर ही पूर्णता को प्राप्त ...
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ग्यारस अर्थात ग्यारह तिथि को एकादशी और तेरस या त्रयोदशी तिथि को प्रदोष कहा जाता है। प्रत्येक शुक्ल और कृष्ण पक्ष में यह दोनों ही तिथियां दो बार आती है। हिन्दू धर्म में एकादशी को विष्णु से तो प्रदोष को शिव से जोड़ा गया है।
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नक्षत्रों के अलग-अलग स्वभाव होते हैं। कोमल, कठोर, उग्र और तीक्ष्ण में से उग्र और तीक्ष्ण स्वभाव वाले नक्षत्रों को ही मूल नक्षत्र, सतैसा या गण्डात कहा जाता है। 27 नक्षत्रों में से मूल, ज्येष्ठा और आश्लेषा नक्षत्र मुख्य मूल नक्षत्र हैं और अश्विनी, ...
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इस बार महाशिवरात्रि के दिन श्रवण नक्षत्र का साक्षी सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग एवं त्रयोदशी प्रदोष का योग बना है, जो शिवभक्तों के लिए बेहद फलदायी होगा। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ है। इस संयोग में भगवान शिव के रुद्राभिषेक का पाठ करें। शिव विशेष वरदान ...
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महाशिवरात्र‍ि 21 फरवरी 2020 को है। आइए जानते हैं भगवान शिव को प्रिय 11 ऐसी सामग्री जो अर्पित करने से भोलेनाथ हर कामना पूरी करते हैं। ये 11 सामग्रियां हैं : जल, बिल्वपत्र, आंकड़ा, धतूरा, भांग, कर्पूर, दूध, चावल, चंदन, भस्म, रुद्राक्ष .....
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फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान परम तेजस्वी लिंग के रूप में प्रकट हुए।
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बुध ने कुंभ राशि में 17 फरवरी 2020, सोमवार से वक्री गति यानी टेढ़ी चाल से चलना शुरू कर दिया है और 10 मार्च 2020 को मार्गी यानी सीधा हो जाएगा।
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हर साल लाखों छात्र-छात्राएं परीक्षा को लेकर तनाव से गुजरते हैं, लेकिन किसी की छात्र को परीक्षा से डरने की कोई जरूरत नहीं होती है। इससे डरने के इसका जश्न मनाना चाहिए, तभी तो आप अपनी एक्जाम में खरे उतर पाएंगे।
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महाशिवरात्रि का शुभ पर्व 21 फरवरी 2020 को है। इस दिन भक्त अपनी-अपनी श्रद्धानुसार पूजन-व्रत और विधान करते हैं। जो पूजन नहीं करते वे भी दीपक अवश्य जलाते हैं। आइए जानते हैं दीपक जलाने के पवित्र नियम...
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19 फरवरी 2020, फाल्गुन कृष्ण एकादशी के दिन विजया एकादशी मनाई जा रही है। इस दिन व्रत-उपवास रखकर और रात्रि जागरण करके श्रीहरि विष्णुजी का पूजन-अर्चन तथा ध्यान करना चाहिए। यह विजया एकादशी 10 दिशाओं से विजय दिलाती है...आइए पढ़ें एकादशी का महात्म्य, पूजा ...
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प्रदोष-व्रत चन्द्रमौलेश्वर भगवान शिव की प्रसन्नता व आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। भगवान शिव को आशुतोष भी कहा गया है, जिसका आशय है-शीघ्र प्रसन्न होकर आशीष देने वाले। प्रदोष-व्रत को श्रद्धा व भक्तिपूर्वक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा ...
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इस वर्ष महाशिवरात्रि पर भक्त दिनभर भगवान की पूजा-अर्चना कर सकेंगे। भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होंगी। इस बार महाशिवरात्रि के दिन शुक्रवार होने तथा श्रवण नक्षत्र होने के कारण भक्तों के लिए विशेष फलदायी योग बन रहे हैं।
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मृत्युंजय महाकाल की आराधना का मृत्यु शैया पर पड़े व्यक्ति को बचाने में विशेष महत्व है। खासकर तब जब व्यक्ति अकाल मृत्यु का शिकार होने वाला हो। इस हेतु एक विशेष जाप से भगवान महाकाल का लक्षार्चन अभिषेक किया जाता है-
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