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भाग्यवर्धक है स्वस्तिक का चिह्न, कभी घर नहीं आएगी दरिद्रता...

Updated: बुधवार, 24 जनवरी 2018 (15:58 IST)
* घर से दरिद्रता को भगाना है तो दरवाजे के दोनों तरफ बनाएं स्वस्तिक का चिह्न...

स्वस्तिक का भारतीय संस्कृति में बड़ा महत्व है। हर शुभ कार्य की शुरुआत स्वस्तिक बनाकर ही की जाती है। यह मंगल-भावना एवं सुख-सौभाग्य का प्रतीक है। ऋग्वेद में स्वस्तिक के देवता सवृन्त का उल्लेख है। 
 
सवृन्त सूत्र के अनुसार इस देवता को मनोवांछित फलदाता संपूर्ण जगत का कल्याण करने और देवताओं को अमरत्व प्रदान करने वाला कहा गया है।
 
स्वस्तिक शब्द को 'सु' और 'अस्ति' दोनों से मिलकर बना है। 'सु' का अर्थ है शुभ और 'अस्तिका' अर्थ है होना यानी जिससे 'शुभ हो', 'कल्याण हो' वही स्वस्तिक है। यही कारण है कि घर के वास्तु को ठीक करने के लिए स्वस्तिक का उपयोग किया जाता है।
 
स्वस्तिक के चिह्न को भाग्यवर्धक वस्तुओं में गिना जाता है। इसे बनाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है। घर में किसी भी तरह का वास्तुदोष होने पर घर के मुख्य द्वार के बाहरी हिस्से को धोएं और गोमूत्र का छिड़काव करें। दरवाजे के दोनों ओर नियम से हल्दी-कुमकुम का स्वस्तिक बनाएं।

यह प्रयोग नियमित रूप से करने पर कई तरह के वास्तुदोष अपने आप खत्म हो जाएंगे। साथ ही, मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और घर में कभी दरिद्रता नहीं आएगी।
 
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:
स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:।
स्वस्तिनस्ता रक्षो अरिष्टनेमि:
स्वस्ति नो बृहस्पर्तिदधातु।।
 
इस मंत्र में 4 बार आए 'स्वस्ति' शब्द के रूप में 4 बार कल्याण और शुभ की कामना से श्रीगणेश के साथ इन्द्र, गरूड़, पूषा और बृहस्पति का ध्यान और आवाहन किया गया है।
 
इस मंगल-प्रतीक का गणेश की उपासना, धन-वैभव और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी के साथ बही-खाते की पूजा की परंपरा आदि में विशेष स्थान है। चारों दिशाओं के अधिपति देवताओं, अग्नि, इन्द्र, वरुण और सोम की पूजा हेतु एवं सप्त ऋषियों के आशीर्वाद को पाने के लिए स्वस्तिक बनाया जाता है। यह चारों दिशाओं और जीवन चक्र का भी प्रतीक है। 
लेखक के बारे में
पं. प्रणयन एम. पाठक
पंडित प्रणयन एम. पाठक जाने-माने ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ है।.... और पढ़ें

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