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Satuvai Amavasya 2026: सतुवाई अमावस्या 2026 कब है, जानें मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Written By WD Feature Desk
Updated: बुधवार, 8 अप्रैल 2026 (17:11 IST)
Satuvai Vaishakh Amavasya importance: साल 2026 की सतुवाई अमावस्या एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है, जिसे विशेष रूप से पितृ तर्पण और पारिवारिक सुख-शांति के लिए मनाया जाता है। अमावस्या का दिन भारतीय संस्कृति में अत्यंत शुभ माना जाता है, खासकर पितृ पूजा और तर्पण के लिए। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति और घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए विशेष महत्व होता है।ALSO READ: Vaishakh maas 2026: वैशाख मास प्रारंभ, जानें इस विशेष माह की 10 खास बातें
 
  • सतुवाई अमावस्या 2026: तिथि और मुहूर्त
  • सतुवाई अमावस्या का महत्व
  • सतुवाई अमावस्या पूजा विधि
  • वैशाख मास-FAQs
यदि आप सतुवाई अमावस्या 2026 के मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि की जानकारी जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। 
 

सतुवाई अमावस्या 2026: तिथि और मुहूर्त

साल 2026 में वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को मनाई जाएगी।
 
वैशाख कृष्ण अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल 2026 को रात 08:11 बजे से
 
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 अप्रैल 2026 को शाम 05:21 बजे तक
 
अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:47 पी एम
 
अमृत काल- 09:50 ए एम से 11:18 ए एम
 
उदया तिथि के अनुसार: मुख्य व्रत और दान-पुण्य 17 अप्रैल, शुक्रवार को किया जाएगा।
 

सतुवाई अमावस्या का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सतुवाई या वैशाख अमावस्या का बहुत अधिक फल मिलता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। इस दिन गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है। भीषण गर्मी की शुरुआत होने के कारण इस दिन ठंडी तासीर वाली चीजों जैसे सत्तू, घड़ा/ मटका, और पंखे का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सतुवाई अमावस्या का पर्व खासतौर पर सात्विक भोजन, सत्तू, तिल, गुड़ और जल से तर्पण करने के लिए प्रसिद्ध है। इस दिन पितृ तर्पण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है और इसे करने से घर में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है।ALSO READ: Vaishakh 2026: वैशाख माह के व्रत त्योहारों की लिस्ट
 

सतुवाई अमावस्या पूजा विधि

सतुवाई अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
 
सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। 
 
यदि संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
 
तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
 
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम से जल और काले तिल अर्पित करें तथा 'ॐ पितृभ्य: नम:' मंत्र का जाप करें।
 
एक मिट्टी के कलश में पानी भरकर, उस पर सत्तू का पात्र रखकर दान करें। 
 
इसके अलावा मौसमी फल और वस्त्रों का दान भी फलदायी होता है।
 
इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं। 
 
साथ ही किसी जरूरतमंद को सीधा यानी कच्चा अनाज दान करें।
 
जरूरी बात: इस दिन 'ॐ पितृभ्य: नम:' मंत्र का जाप करना लाभकारी रहता है। सतुवाई अमावस्या के दिन सत्तू खाना और दान करना केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अच्छा माना जाता है क्योंकि यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है। 

 

वैशाख मास-FAQs

 
1. गंगा स्नान का समय कौन सा है?
वैशाख मास में विशेष तिथियों पर, जैसे अमावस्या, पूर्णिमा या अन्य शुभ दिन, गंगा स्नान करने से पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
 
2. वैशाख मास में क्या व्रत किए जाते हैं?
इस माह में कई व्रत किए जाते हैं, जैसे सोमवार व्रत, अमावस्या पितृ तर्पण, पूर्णिमा व्रत, अक्षय तृतीया व्रत, जो पुण्य और समृद्धि बढ़ाने के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
 
8. वैशाख मास में कौन से त्योहार आते हैं?
मुख्य त्योहार हैं: सतुवाई, दर्श अमावस्या, गंगा स्नान, बैसाखी, अक्षय तृतीया, बुद्ध पूर्णिमा।
 
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