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पंचक में शुरू हो रहा है सावन, क्या होगा असर

Updated: शनिवार, 24 जुलाई 2021 (13:13 IST)
अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार इस बार श्रावण मास में 25 जुलाई रविवार से पंचक शुरू हो जाएगा जो 30 जुलाई 2021 को समाप्त होगा। रविवार से प्रारंभ होने वाले पंचक को रोग पंचक कहते हैं। प्रत्येक वार से प्रारंभ होने वाले पंचक का नाम अलग होता है। आओ जानते हैं इस पंचक का असर।
 
 
1. पंचक क्या है : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है।
 
2. रोग पंचक का असर : माना जाता है कि जिस पंचक का प्रारंभ रविवार से होता है, उसमें 5 दिनों तक शारीरिक या मानसिक यातनाएं जातक को झेलनी पड़ सकती है। इस दौरान स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
 
पंचक में नहीं करते हैं ये पांच कार्य:-
'अग्नि-चौरभयं रोगो राजपीडा धनक्षतिः।
संग्रहे तृण-काष्ठानां कृते वस्वादि-पंचके।।'-मुहूर्त-चिंतामणि
अर्थात:- पंचक में तिनकों और काष्ठों के संग्रह से अग्निभय, चोरभय, रोगभय, राजभय एवं धनहानि संभव है।
1.लकड़ी एकत्र करना या खरीदना, 2. मकान पर छत डलवाना, 3. शव जलाना, 4. पलंग या चारपाई बनवाना और दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना।
 
समाधान : 
1. यदि लकड़ी खरीदना अनिवार्य हो तो पंचक काल समाप्त होने पर गायत्री माता के नाम का हवन कराएं। 
2. यदि मकान पर छत डलवाना अनिवार्य हो तो मजदूरों को मिठाई खिलने के पश्चात ही छत डलवाने का कार्य करें।
3. यदि पंचक काल में शव दाह करना अनिवार्य हो तो शव दाह करते समय पांच अलग पुतले बनाकर उन्हें भी आवश्य जलाएं। 
4. इसी तरह यदि पंचक काल में पलंग या चारपाई लाना जरूरी हो तो पंचक काल की समाप्ति के पश्चात ही इस पलंग या चारपाई का प्रयोग करें।
5. अंत में यह कि यदि पंचक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो तो हनुमान मंदिर में फल चढ़ाकर यात्रा प्रारंभ कर सकते हैं। ऐसा करने से पंचक दोष दूर हो जाता है।

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