मिथुन संक्रांति पर्व 15 जून को: मिथुन राशि में प्रवेश करेगा सूर्य, अर्घ्य देने से मिलता है आरोग्य


मिथुन संक्रांति का क्या है महत्व, जानिए 8 खास बातें
: सूर्य ग्रह 15 जून, 2022 गुरुवार को मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। मिथुन राशि में परिवर्तन को मिथुन संक्रांति कहते हैं। आओ जानते हैं कि क्या महत्व है इस संक्रांति का।

1. ओड़िसा में मिथुन संक्रांति का महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य से अच्‍छी फसल के लिए बारिश की मनोकामना करते हैं।

2. 15 जून को सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में जब प्रवेश करेंगे तो सभी नक्षत्रों में राशियों की दिशा भी बदल जाएगी। इस बदलाव को बड़ा माना जाता है। सूर्य जब कृतिका नक्षत्र से रोहिणी नक्षत्र में आते हैं तो बारिश की संभावना बनती है। रोहिणी से अब मृगशिरा में प्रवेश करेंगे।

3. मिथुन राशि में मृगशिरा नक्षत्र के 2 चरण, आद्रा, पुनर्वसु के 3 चरण रहते हैं। मिथुन संक्रांति के दौरान पुष्य और अष्लेषा नक्षत्र रहेंगे।

4. मिथुन संक्रांति के बाद से ही वर्षा ऋतु की विधिवत रूप से शुरुआत हो जाती है।

5. इस दिन भगवान सूर्यदेव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन स्नान और दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। सूर्य को अर्घ्य देने से मिलता है धन, संपदा, सौभाग्य और आरोग्य का शुभ वरदान....


6. मिथुन संक्रांति को रज पर्व भी कहा जाता है। इस दिन कई जगहों पर व्रत भी रखा जाता है।

7. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सिलबट्टे को दूध और पानी से पहले स्नान कराकर उसकी पूजा की जाती है।

8. ज्योतिषियों के अनुसार मिथुन संक्रांति के दौरान वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है इसीलिए सेहत का ध्यान रखना जरूरी होता है।


मिथुन संक्रांति पर्व 15 जून को: मिथुन राशि में प्रवेश करेगा सूर्य, अर्घ्य देने से मिलता है आरोग्य





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