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आषाढ़ अमावस्या का महत्व और 3 अचूक उपाय से होगा पितृदोष दूर

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 24 जून 2025 (10:43 IST)
Ashadh amavasya 2025: आषाढ़ अमावस्या हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो पितरों की शांति और पितृदोष निवारण के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ती है। इस बार उदयातिथि के अनुसार 25 जून 2025 दिन बुधवार को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी।ALSO READ: आषाढ़ माह प्रारंभ, जानिए इस माह के व्रत और त्योहारों की लिस्ट
 
आषाढ़ अमावस्या का महत्व: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार विशेष रूप से यह दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए समर्पित है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है।

ऐसा माना जाता है कि इससे पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही आषाढ़ी अमावस्या को 'हलहारिणी अमावस्या' भी कहा जाता है, क्योंकि यह वर्षा ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है और किसानों के लिए महत्वपूर्ण होने के कारण इस दिन किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं।
 
आषाढ़ अमावस्या पर पितृदोष दूर करने के 3 अचूक उपाय : पितृदोष एक ऐसा दोष है जो पूर्वजों की अतृप्त आत्माओं या उनकी अप्रसन्नता के कारण उत्पन्न होता है। आषाढ़ अमावस्या पर कुछ विशेष उपाय करने से पितृदोष को शांत किया जा सकता है:
 
उपाय 1. पितृ तर्पण और दान: आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। 
 
फिर एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल, काले तिल, जौ और थोड़ा गंगाजल मिलाएं। अपनी अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर में कुश/ पवित्र घास की अंगूठी धारण करें या हाथ में कुश पकड़ें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें, क्योंकि यह पितरों की दिशा मानी जाती है। 'ॐ आगच्छन्तु में पितर इमम ग्रहन्तु जलान्जलिम' या 'ॐ पितृभ्यः नमः' मंत्र का जाप करते हुए पितरों का स्मरण करें और धीरे-धीरे जल अर्पित करें। इस अवसर पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए ब्राह्मणों, गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, सफेद वस्त्र, काले तिल, घी, आटा, गुड़ और दक्षिणा का दान करें। गायों और कुत्तों को रोटी खिलाना भी शुभ माना जाता है।ALSO READ: 7 अक्टूबर के पहले भारत को करना होंगे ये 7 कार्य वर्ना मुश्किल में होगा भविष्य
 
उपाय 2. पीपल वृक्ष का पूजन और दीपक जलाना: आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं। पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव तीनों देवों का वास माना जाता है। जल चढ़ाने के बाद पीपल की 7 बार परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे तिल के तेल या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दीपक में थोड़े काले तिल भी डालें। और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ पितृदेवाय नमः' मंत्र का जाप करें। माना जाता है कि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और बाधाएं दूर होती हैं।
 
उपाय 3. पितृ स्तोत्र का पाठ और श्राद्ध कर्म: आषाढ़ अमावस्या के दिन पितृ स्तोत्र का पाठ करना, पितृदोष से मुक्ति पाने और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका है। यदि आप स्वयं नहीं कर सकते, तो ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें तथा यदि संभव हो, तो किसी योग्य ब्राह्मण से पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म या पिंडदान करवाएं। घर की दक्षिण दिशा में पितरों की तस्वीर साफ करें और उन पर फूल-माला चढ़ाएं। शाम को घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें काले तिल डालें। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं। 
 
इन उपायों को श्रद्धापूर्वक करने से पितृदोष का प्रभाव कम होता है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है।ALSO READ: भविष्यवाणी: 7 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच बचकर रहें, विमान से संबंधित घटना के बन रहे हैं योग

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