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हलहारिणी अमावस्या कब है? जानिए शुभ मुहूर्त, दान और पूजा विधि

Updated: मंगलवार, 28 जून 2022 (09:27 IST)
Halharini amavasya 2022
 

हलहारिणी अमावस्या (Halharini Amavasya) इस वर्ष 28 जून 2022, दिन मंगलवार को मनाई जा रही है। यह आषाढ़ माह की अमावस्या है, अत: इसे आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है।यह दिन किसानों के लिए बेहद खास है, इसीलिए इस दिन विशेष तौर पर धरती माता की पूजा की जाती है।

इस दिन शुभ काम करने से जीवन में खुशहाली का आगमन होता है। अमावस्या पर नदी स्नान-दान एवं पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा है। इस तिथि पर पितृ देवता का तर्पण, धूप-ध्यान, पूजन, अर्घ्य आदि कार्य करना चाहिए। मान्यतानुसार इस अमावस्या पर भगवान भोलेनाथ विशेष वरदान देते हैं। ज्ञात हो कि कैलेंडर के मतभेद के चलते यह 29 जून को भी मनाई जाएगी। 
 
हलहारिणी अमावस्या के शुभ मुहूर्त- 
 
आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि- 28 जून 2022
अमावस्या तिथि का आरंभ: 28 जून, सुबह 05:53 मिनट से होगा। 
29 जून 2022 को सुबह 08:23 मिनट पर अमावस्या तिथि समाप्त होगी। 

इस दिन निम्न सामग्री का दान करना चाहिए-Amavasya Daan Samgari 
 
तिल, 
कंबल, 
तेल, 
खिचड़ी, 
पुस्तक,
उड़द दाल, 
रुई, 
वस्त्र, 
छाता, 
साबूदाना, 
चादर, 
चावल, 
राई, 
साबुन, 
कंघी, 
चना दाल, 
मिठाई,
अन्न आदि का दान करना चाहिए।
 
पूजा विधि-Amavasya Puja Vidhi 2022
 
- हलहारिणी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करें। 
 
- इस दिन संभव हो तो व्रत-उपवास करें। 
 
- नहाने से पूर्व जल को प्रणाम करें। 
 
- गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें।
 
- सूर्यदेव को तांबे के पात्र में काले तिल, लाल चंदन, लाल पुष्प आदि जल में डालकर अर्घ्य अर्पित करें। 
 
- इस दिन पितरों का पूजन, तर्पण अवश्य करें, इससे पितृ प्रसन्न होकर वरदान और आशीष देते हैं। 
 
- अमावस्या तिथि पितृदोष और कालसर्प दोष को दूर करने के लिए काफी शुभ मानी जाती है। अत: अगर नदी या सरोवर तट पर स्नान कर रहे हैं तो तिल मिश्रित जलधारा प्रवाहित करें। 
 
- पुष्प, फल, धूप, दीप, अगरबत्ती आदि चीजों से भगवान विष्णु और शिव-पार्वती जी तथा तुलसी का पूजन करें। 
 
- पूजन के बाद जरूरतमंद, गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन कराएं, तत्पश्चात स्वयं भोजन ग्रहण करें। 
 
- अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा तथा अन्य रोजमर्रा की जरूरतों की सामग्री का दान अवश्‍य करें।
 
- इस दिन चीटियों को आटा मिश्रित शकर अवश्य खिलाएं, इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
 
- पितृ ऋण से मुक्ति के लिए आषाढ़ अमावस्या पर यज्ञ अवश्य करना चाहिए।


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