सिंहासन बत्तीसी : बीसवीं पुतली ज्ञानवती की कहानी

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वह राजा से बोला, 'ज्योतिष शास्‍त्र कहता है कि कमल चिन्ह जिसके पांवों में मौजूद हों वह व्यक्ति राजा होगा ही, मगर यह सरासर असत्य है।

जिसके पांवों पर मैंने ये चिन्ह देखे वह पुश्तैनी लकड़हारा है। दूर-दूर तक उसका सम्बन्ध किसी राजघराने से नहीं है। पेट भरने के लिए जी-तोड़ मेहनत करता है तथा हर सुख-सुविधा से वंचित है। दूसरी ओर आप जैसा चक्रवर्ती सम्राट है, जिसके भाग्य में भोग करने वाली हर चीज़ है। जिसकी कीर्ति दूर-दूर तक फैली हुई है। आपको राजाओं का राजा कहा जाता है मगर आपके पांवों में ऐसा कोई चिन्ह मौजूद नहीं है।'
राजा को हंसी आ गई और उन्होंने पूछा, 'क्या आपका विश्वास अपने ज्ञान तथा विद्या पर से उठ गया?'

ज्योतिषी ने जवाब दिया, 'बिलकुल। मुझे अब रत्तीभर भी विश्वास नहीं रहा।' उसने राजा से नम्रतापूर्वक विदा लेते हुए अपने मित्र से चलने का इशारा किया। जब वह चलने को हुआ तो राजा ने उसे रुकने को कहा।
दोनों ठिठककर रुक गए। विक्रम ने एक चाकू मंगवाया तथा पैरों के तलवों को खुरचने लगे। खुरचने पर तलवों की चमड़ी उतर गई और अन्दर से कमल के चिन्ह स्पष्ट हो गए।



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