सिंहासन बत्तीसी : उन्‍नीसवीं पुतली रूपरेखा की कहानी

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उन्होंने सेठ पुत्र के साथ जो कुछ घटा था उन्हें विस्तारपूर्वक बताया तो उनके मन में कोई संशय नहीं रहा। उन तपस्वियों ने उन्हें एक चमत्कारी खड़िया दिया जिससे बनाई गई तस्वीरें रात में सजीव हो सकती थीं और उनका वार्तालाप भी सुना जा सकता था।

विक्रम ने कुछ तस्वीरें बनाकर खड़िया की सत्यता जानने की कोशिश की तो सचमुच खड़िया में वह गुण था। अब राजा तस्वीरें बना-बना कर अपना मन बहलाने लगे। अपनी रानियों की उन्हें बिलकुल सुध नहीं रही। जब रानियां कई दिनों के बाद उनके पास आईं तो राजा को खड़िया से चित्र बनाते हुए देखा।

रानियों ने आकर उनका ध्यान बंटाया तो राजा को हंसी आ गई और उन्होंने कहा, वे भी मन के आधीन हो गए थे। अब उन्हें अपने कर्तव्य का ज्ञान हो चुका है
(समाप्त)






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