विवेकानंद को मिला था गुरु का आशीर्वाद

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रामकृष्ण मूर्तिपूजक थे, जो ब्रह्म समाज को कतई स्वीकार्य नहीं था। नरेन्द्र को यह नौकरी न मिलना भी शायद एक दैवी संयोग बन गया, वरना नरेन्द्र कभी भी विवेकानंद बन कर विश्वव्यापी ख्याति अर्जित न कर पाते।

अक्सर कहा करते थे, 'मेरा नरेन्द्र सामान्य मानव नहीं है। वह ब्रह्मलोक का ऋषि है।' गुरु ने ही शिष्य को प्रतिकूलताओं में शक्ति दी। फिर वे कहां से कहां पहुंच गए, यह कथा सभी को विज्ञात है।

संकलन : लाजपत राय सभरवा




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