नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले गिरोह का पर्दाफाश

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित रविवार, 9 मार्च 2014 (21:18 IST)
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नई दिल्ली। नाइजीरिया के दो नागरिकों सहित 18 लोगों की गिरफ्तारी के साथ ने एक ऐसे बड़े का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जिसमें प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने वाले फर्जी मेल भेजकर भोले-भाले नौजवानों को झांसा दिया जाता था। आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी मेल भेजकर नौजवानों से पैसे ऐंठे जाते थे।


यह गिरोह खास तौर पर देश के दक्षिणी हिस्सों में रहने वाले नौजवानों को निशाना बनाता था क्योंकि उसे लगता था कि पीड़ित नौजवान उन्हें खोजते हुए न तो दिल्ली तक आएंगे और न ही पुलिस में शिकायत करेंगे। दिल्ली पुलिस को देश भर से ऐसी करीब 300 शिकायतें मिली जिन पर कार्रवाई करते हुए पिछले साल अगस्त में अपराध शाखा पुलिस थाने में एक प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) रविंद्र यादव ने कहा, गिरोह का मानना था कि चूंकि हैदराबाद और बेंगलूर जैसे दक्षिणी शहरों के लोग तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और साथ ही साथ अंग्रेजी भी अच्छी जानते हैं तो उन्हें ई-मेल के जरिए ठगना ज्यादा आसान होगा। ऐसे मामले पहले भी सामने आए थे पर इस मामले में दिलचस्प यह है कि गिरोह का सरगना नाइजीरिया से इन अपराधों को अंजाम दे रहा था और दो मॉड्यूलों के जरिए पूरा गिरोह चला रहा था।

दोनों मॉड्यूलों को एक-दूसरे के वजूद में होने के बारे में कुछ भी पता नहीं था। यादव ने बताया, इस गिरोह के दो मॉड्यूल थे। पहले हिस्से में दो नाइजीरियाई नागरिक थे जिनकी पहचान चिनेदु सिप्रियल (24) और दुबुईजी चार्ल्स (28) के रूप में हुई। दो अन्य सहयोगी फरार हैं। उन्होंने कहा, वे नौकरियों से जुड़े विभिन्न सर्च इंजनों से भोले-भाले बेरोजगारों की ई-मेल आईडी खरीदते थे और प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर उन्हें नौकरियों के फर्जी ऑफर भेजा करते थे।

दोनों आरोपियों ने मोबाइल की दुकानों से उंची कीमतों पर विभिन्न सेवा प्रदाता कंपनियों के ऐक्टिवेटेड सिम कार्ड खरीदे। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी किए गए। रैकेट दो अंतिम पुलिस ने कहा कि गिरोह के लोग फर्जी ई-मेल आईडी बनाते थे जो कंपनी के असली ई-मेल आईडी से मेल खाते थे।

इन्हीं आईडी के जरिए पीड़ित नौजवानों को ई-मेल भेजकर लाखों रुपए वाली नौकरियों की पेशकश की जाती थी। यादव ने कहा, एक बार जब उनके निशाने पर आया शख्स संतुष्ट हो जाता था तो वे उससे खास बैंक खातों में ‘इंटरव्यू सुरक्षा राशि जमा करने को कहते थे। धनराशि की मांग व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करती थी । वे उनसे ई-मेल के जरिए भुगतान पर्ची भेजने को भी कहते थे।
उन्होंने बताया, जब पीड़ित पैसे जमा कर देता था तो वे किसी न किसी बहाने से और पेशे जमा कराने को कहते थे। दूसरे मॉड्यूल में भारतीय नौजवान थे जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवा रखे थे। पीड़ितों को खातों के नंबर बताए जाते थे। धनराशि के अंतरण के तुरंत बाद गिरोह के लोग एटीएम के जरिए पैसे निकाल लेते थे।
गिरोह के ऐसे लोगों में दिल्ली का रहने वाला अनिल कुमार (33), कोलकाता का रहने वाला सुजीत कुमार दुबे (32) और हरियाणा का रहने वाला जितेंद्र कुमार (31) अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। उपरोक्त पांच लोगों के अलावा इस मामले में गिरफ्तार 11 अन्य लोगों में विभिन्न वितरक और रिटेलर हैं जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पहले से एक्टिवेटेड सिम कार्ड बेचे।

पुलिस ने बताया कि कुलवंत सिंह (30) को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह इन सिम काडरें को एक्टिवेट कराने के लिए फर्जी पहचान-पत्र तैयार करता था। इस मामले में की जांच का जिम्मा सब-इंस्पेक्टर विनय त्यागी को सौंपा गया है। सहायक पुलिस आयुक्त होशियार सिंह जांच में अपने दिशानिर्देश देंगे। (भाषा)



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