2जी स्पेक्ट्रम घोटाला : मुख्य घटनाक्रम

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित बुधवार, 2 फ़रवरी 2011 (21:15 IST)
2जी स्पेक्ट्रम मामले में हुई घटनाएँ इस प्रकार से हैं-

16 मई 2007 : ए. राजा को दूसरी बार दूरसंचार मंत्री नियुक्त किया गया।

25 अक्टूबर 2007 : केंद्र सरकार ने मोबाइल सेवाओं के लिए 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की संभावनाओं को खारिज किया।

सितंबर-अक्टूबर 2008 : दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए।

15 नवंबर 2008 : केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में खामियाँ पाईं और दूरसंचार मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की।
21 अक्टूबर 2009 : सीबीआई ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जाँच के लिए मामला दर्ज किया।

22 अक्टूबर 2009 : मामले के सिलसिले में सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर छापेमारी की।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दूसरी पीढ़ी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया।
नवंबर 2010 : दूरसंचार मंत्री ए. राजा को हटाने की माँग को लेकर विपक्ष ने संसद की कार्यवाही ठप की।

14 नवंबर 2010 : राजा ने इस्तीफा दिया।

15 नवंबर 2010 : मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसके बाद नवंबर में ही 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जाँच के लिए जेपीसी गठित करने की माँग को लेकर संसद में गतिरोध जारी रहा।
13 दिसंबर 2010 : दूरसंचार विभाग ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी. पाटिल समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने के लिए अधिसूचित किया। इसे दूरसंचार मंत्री को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया।

24 और 25 दिसंबर 2010 : राजा से सीबीआई ने पूछताछ की।

31 जनवरी 2011 : राजा से सीबीआई ने तीसरी बार फिर पूछताछ की। एक सदस्यीय पाटिल समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
दो फरवरी 2011 : टू जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आरके चंदोलिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। (भाषा)




और भी पढ़ें :