नए बैंकों से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच बढ़ेगी

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित गुरुवार, 4 जुलाई 2013 (17:50 IST)
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नई दिल्ली। द्वारा नए खिलाड़ियों को में उतरने की अनुमति दिए जाने से इस क्षेत्र की दक्षता बढ़ेगी, पूंजी आधार मजबूत होगा, अर्थव्यवस्था की ऋण की जरूरत को पूरा किया जा सकेगा तथा साथ ही इससे रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।


उद्योग मंडल फिक्की के एक में कहा गया है कि देश में सिर्फ 35 प्रतिशत आबादी के पास औपचारिक बैंक खाता है और इस लिहाज से नए बैंकों की स्थापना काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में औसतन 41 फीसद आबादी का बैंक खाता है।
सर्वेक्षण में मौजूदा बैंकों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), कॉर्पोरेट जगत तथा उद्योग घरानों के विचारों को शामिल किया गया है।


रिजर्व बैंक ने बैंकिंग लाइसेंस आवेदकों के समक्ष कम से कम 25 प्रतिशत बैंक शाखाएं 9,999 की आबादी से कम के ऐसे इलाकों में खोलने की शर्त रखी है, जहां फिलहाल बैंकिंग सुविधाएं नहीं हैं।

सर्वेक्षण में शामिल 80 प्रतिशत लोगों का कहना है कि रिजर्व बैंक की इस शर्त से बैंकिंग सेवाओं के विस्तार तथा वित्तीय समावेशी को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।

इसमें कहा गया है कि देश की 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। करीब 6.5 लाख गांवों में से अधिकांश में आज भी एक बैंक शाखा नहीं है। ऐसे में देश की ग्रामीण आबादी अपनी ऋण की जरूरत को पूरा करने के लिए सूदखोरों पर निर्भर है। (भाषा)



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