भारत ने खोजे तीन नए बैक्टेरिया

बेंगलुरु (वार्ता)| वार्ता| पुनः संशोधित सोमवार, 16 मार्च 2009 (20:55 IST)
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भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में बैक्टेरिया की तीन नई प्रजातियों की खोज की है, जो का उच्च प्रतिरोधक है।


इनमें से एक नई प्रजाति का नाम प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिक फ्रेड होयली के नाम पर जेनीबैक्टर होयली, जबकि दूसरी प्रजाति का बैलून प्रयोग में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की भागीदारी को मान्यता देते हुए बेसिलस इसरोनेंसिस रखा गया है। तीसरी प्रजाति का नाम प्रसिद्ध भारतीय खगोलविद आर्यभट्ट और इसरो के प्रथम उपग्रह आर्य भट्ट के नाम पर बेसिलस आर्यभट्ट रखा गया है।
इसरो के अनुसार यह प्रयोग 459 किलोग्राम के वैज्ञानिक उपकरण को अंतरिक्ष में ले जाने वाले 26.7 लाख घन फुट के बैलून के जरिये किया गया है। इस बैलून को हैदराबाद के राष्ट्रीय बैलून केंद्र से उड़ाया गया था और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ने इसका संचालन किया था। इसमें अंतरिक्ष से वायु के नमूने लेने के लिए 16 इस्पात के सिलेंडर लगाए गए थे। ये नमूने 20 किलोमीटर से 41 किलोमीटर की ऊँचाई पर लिए गए।

इन नमूनों का हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मोलिक्यूलर बायोलॉजी के साथ ही पुणे स्थित नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस में अध्ययन किया गया, जिनमें 15 बैक्टेरियल और छह फंगल प्रजातियाँ पाई गई तथा उनमें से नौ प्रजातियाँ 16 एस आरएनए जीन पर आधारित थी और पृथ्वी पर पाई जाने वाली प्रजातियाँ से 98 प्रतिशत समानता पाई गई।

उनमें से बैक्टेरिया की तीन प्रजातियाँ पीवीएएस 1 बी 3, डब्ल्यू 22 और बी 8222 पाई गई, जो पूरी तरह से नई थी। ये तीनो प्रजातियाँ उच्च प्रतिरोधक क्षमता वाली हैं।

जानकारी के मुताबिक इसरो द्वारा किया गया यह दूसरा प्रयोग है। पहला प्रयोग वर्ष 2001 में किया गया था। प्रथम प्रयोग में सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद उस प्रयोग को दोहराने का निर्णय लिया गया था।



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