शिवराज ने बना लिया था इस्तीफे का मन

भोपाल (वार्ता)| वार्ता| पुनः संशोधित रविवार, 14 दिसंबर 2008 (22:08 IST)
के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से अपने और परिजनों के खिलाफ लगाए गए व्यक्तिगत आक्षेपों से मुख्यमंत्री इतने आहत थे कि उन्होंने तब पद से त्यागपत्र देने का भी मन बना लिया था।

निजी न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में शिवराज ने कहा है कि डंपर मामले को लेकर विपक्षी सदस्यों ने उन्हें और उनके परिवारजनों को बेवजह निशाना बनाया। यहाँ तक कि व्यक्तिगत आक्षेप लगाने से नहीं चूके। इसकी वजह से वे रात में सो भी नहीं पाते थे और उन्होंने अपने पद से त्याग-पत्र देने का मन बना लिया था।

मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरे कार्यकाल के लिए 12 दिसंबर को शपथ लेने वाले चौहान ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने तब वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और अध्यक्ष राजनाथ सिंह से चर्चा की तो उन्होंने त्याग-पत्र नहीं देने के लिए कहा।
चौहान के मुताबिक वरिष्ठ नेताओं ने कहा हमें शिवराज पर पूरा भरोसा है और वह ऐसा काम नहीं कर सकता है, इसलिए विपक्ष से राजनीति के तौर पर लड़ाई लड़ना चाहिए। चौहान का साक्षात्कार आज रात्रि में प्रसारित होगा1

चौहान ने कहा वरिष्ठ नेताओं की ओर से ढाँढ़स बंधाने के बाद उन्होंने पलायन नहीं करने और छल-कपट की इस राजनीति का जवाब छल-कपट से नहीं, बल्कि सही सोच और विकास कार्यों को अंजाम देकर करने का फैसला लिया था, जो उचित साबित हुआ।
पत्नी साधना चौहान की मौजूदगी में हुए साक्षात्कार में चौहान ने कहा डंपर मामले में लग रहे आक्षेपों से पत्नी भी बेहद आहत थी और वे रात-रात भर रोती रहती थीं।

चौहान ने बताया अब उनका सपना मध्यप्रदेश को नंबर वन राज्य बनाने का है। उनकी सरकार सबसे पहले महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाएगी। इसके अलावा किसानों की स्थिति में सुधार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुदृढ बनाना उनकी प्राथमिकता में शामिल है।
अगले 3-4 वर्षों में राज्य में इतनी बिजली उत्पादन का लक्ष्य है, ताकि गाँवों में भी लोगों को 24 घंटे बिजली दी जा सके। चौहान ने इस संभावना से इनकार किया कि वह कभी राजनीति में आएँगी। हालाँकि उन्होंने कहा वे पहले ही की तरह राजनीति से अलग रहकर विकास कार्यों में अपना पूरा सहयोग देती रहेंगी।



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