आ गया मौसमी दैत्य एल नीन्यो

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- राम याद
मौसम वैज्ञानिकों के लिए वह एक दानव के समान है। हर कुछ वर्षों पर आया करता है। दक्षिणी प्रशांत महासागर से उठता है और पूरे संसार के मौसम को झकझोर देता है...नाम है एल नीन्यो। एल नीन्यो स्पेनी भाषा का शब्द है। अर्थ है बालक क्राइस्ट (ईसा मसीह)। पर क्राइस्ट जैसा शांत और सौम्य नहीं, शिव के तांडव जैसा उग्र और क्रुद्ध होता है।


मौसम वैज्ञानिकों ने पाया कि जून में भूमध्यरेखा के पास के पूर्वी प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक था। प्रशांत महासागर के अन्य उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में भी 200 मीटर की गहराई तक पानी का तापमान बढ़ गया था। तापमान का बढ़ना अगली सर्दियों के दौरान भी चलता रहेगा। कहीं बाढ़ आएगी, तो कहीं सूखा पड़ेगा। कहीं घटेंगे, तो कहीं बढ़ेंगे। वैसे, एल नीन्यो आखिर है क्या?
'एल नीन्यो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के तापमान में ऐसी असामान्य वृद्धि है, जो मोटे तौर पर हर दो से सात वर्षों पर देखने में आती है। ला नीन्या उसकी बहन है, जो लगभग इतने ही अंतर के साथ उष्णकटिबंधीय प्रशांत के तापमान में गिरावट के रूप में देखने में आती है।-मौसम वैज्ञानिक माइकल मैकफैडन

हिंद महासागर में छोटा एल नीन्यो :समुद्र जल के तापमान में असामान्य वृद्धि वाला एल नीन्यो प्रभाव प्रशांत महासागर के साथ-साथ भूमध्यरेखा के पास वाले हिंद महासगर में भी देखने में आता है। सागर जल गरम होने से उस के ऊपर की हवा भी गरम होने लगती है। पूर्वी और पश्चिमी प्रशांत के बीच की हवा के दबाव में उतार-चढ़ाव का एक ऐसा क्रम चल पड़ता है, जिसे मौसम वैज्ञानिक सदर्न ऑसिलेशन कहते हैं। भले ही वे तापमान, पानी और वायु दबाव के बीच इस खेल को अभी अच्छी तरह समझ नहीं पाए हैं।
'एल नीन्यो प्रशांत महासागर में इतना बड़ा आयाम इसलिए प्राप्त कर लेता है क्योंकि इस क्षेत्र में जल विस्तार बहुत बड़ा है। वहाँ महाद्वीपीय क्रियाओं का कोई खास असर नहीं रह जाता।'-माइकल मैकफैडन

महा‍द्वीपीय क्रियाओं का मतलब है कि हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर में भी एक सीमित स्तर पर एल नीन्यो जैसा मौसमी प्रभाव पैदा होता है। इसे इंडियन डाइपोल या अटलांटिक वॉर्मिंग इवेन्ट भी कहा जाता है। पर उनका जीवनकाल छोटा होता है और आयाम भी उतना बड़ा नहीं होता, जितना एल नीन्यो का होता है।
अटलांटिक में तूफान घटेंगे:
अटलांटिक महासागर वाले देशों में एल नीन्यो प्रभाव से चक्रवाती तूफानों की संख्या आमतौर पर घटती है। जून से पहले इन देशों में 2009 में 11 चक्रवाती तूफान आने का अनुमान लगाया गया। उसे अब घटाकर 10 कर दिया गया है। 1992 के बाद से इस बार अगस्त तक का समय सबसे कम तूफानी रहा। लेकिन हो सकता है कि अटलांटिक महासागर वाले देशों में सर्दियों वाला समय अधिक तूफानी साबित हो।
भारत पर असर नहीं :
एल नीन्यो का मौसमी प्रभाव करीब एक साल चलता है। जब भी वह सक्रिय होता है, तब मध्य और दक्षिणी अमेरिका में खूब वर्षा और बाढ़ लाता है। जबकि इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया सूखे रह जाते हैं। भारत पर उसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है।

'हमारे यहाँ के अध्ययन दिखाते हैं कि एल नीन्यो वाले अधिकतर वर्षों में हमारे यहाँ की सक्रियता कुछ कम रही। लेकिन एल नीन्यो वाले कुछ वर्षों में हमारे यहाँ अच्छी भी रही। मानसून फेल नहीं हुआ। इसलिए, हम वैसा कोई सीधा संबंध नहीं दिखा सकते, जैसा ऑस्ट्रेलिया जैसे कुछ देशों में देखने में आता है।'- भारतीय मौसम प्रमुख एबी मजूमदार



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