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Written By भाषा

पटरी पर लौट रही है अर्थव्यवस्था-मनमोहन

भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली वैश्विक आर्थिक नरमी अंत की ओर है। अब आर्थिक हालात सामान्य हो रहे हैं। यह बात प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने मंगलवार को योजना आयोग की पूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

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उन्होंने अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि वैश्विक आर्थिक नरमी के कारण हमारे लिए पिछला साल मुश्किलों भरा रहा। मुश्किलें अब अब खत्म हो रही हैं, क्योंकि आने वाले महीनों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होगी।

आयोग की आज की बैठक में अर्थव्यवस्था के हालात और एकीकृत ऊर्जा नीति (आईईपी) की स्थिति का आकलन किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा देश खराब मानसून का भी सामना कर रहा है। सिंह ने कहा कि योजना आयोग पूरी अर्थव्यवस्था का आकलन प्रस्तुत करे तो यह उसके लिए उपयोगी होगा।

संप्रग सरकार के दूसरे कार्यकाल के गठन के बाद हो रही योजना आयोग की पहली पूर्ण बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेकसिंह अहलूवालिया के अलावा अन्य सदस्य भी शामिल हैं।

इस बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, कृषि मंत्री शरद पवार और गृह मंत्री पी. चिदंबरम समेत संप्रग सरकार के करीब एक दर्जन से ज्यादा मंत्री हिस्सा ले रहे हैं।

वैश्विक वित्तीय संकट के असर के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2008-09 में घटकर 6.7 फीसद पर आ गई, जो इसके पिछले वित्त वर्ष में करीब नौ फीसद पर थी। योजना आयोग के मुताबिक वृद्धि दर 2009-10 के दौरान और अधिक घटकर 6.3 फीसद पर आ जाएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था की समीक्षा महत्वपूर्ण है, इसलिए नहीं कि हम संप्रग सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू कर रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि हम 11वीं पंचवर्षीय योजना 2007-12 के मध्य में हैं।

सिंह ने तर्कसंगत उर्जा नीति की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि हमारी आर्थिक वृद्धि के लिए ऊर्जा आवश्यक है और यही क्षेत्र है जिसके लिए हमें आयात पर निर्भर करना पड़ता है। हम अपनी पेट्रोलियम जरूरतों के 70 फीसद हिस्से का आयात करते हैं और हम ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि कोयले के भी आयात पर निर्भर करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि तर्कसंगत ऊर्जा नीति जलवायु परिवर्तन के खतरे के मद्देनजर उठाए जाने वाले कदमों के लिए महत्वपूर्ण है।

सिंह ने कहा यह नई जरूरत है और हमें इसका आकलन करने के लिए जरूरत है कि हम अपनी ऊर्जा नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं संबंध में लीक पर हैं या नहीं।