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Written By भाषा
पुनः संशोधित रविवार, 21 जून 2009 (15:33 IST)

'कारों की बाजार हिस्सेदारी बढ़ेगी'

भारतीय कार बाजार में 2015 तक भारी बदलाव देखने को मिल सकता है और बी सेगमेंट की प्रीमियम कारों की बिक्री की वृद्धि दर एंट्री लेवल या ए सेगमेंट की कारों के मुकाबले ज्यादा होगी।

वैश्विक परामर्शक बूज एंड कंपनी ने कहा कि वाणिज्यिक वाहन खंड में सबसे अधिक रचनात्मकता दिख सकती है। बूज एंड कंपनी के भागीदार विकास सहगल ने कहा 2015 तक बी सेगमेंट की कारों की बिक्री की वृद्धि दर ए सेगमेंट की कारों से ज्यादा हो जाएगी।

वह भारतीय यात्री कार बाजार के सबसे बड़े खंड ए सेगमेंट की बाजार हिस्सेदारी से मुकाबला शुरू कर देगी। उन्होंने कहा कि कार बाजार 2015 तक 28 लाख से 30 लाख इकाई सालाना तक पहुँच जाएगा और प्रमुख कंपनियाँ अपनी मौजूदा स्थिति को बरकरार रखेंगी।

भारतीय यात्री कार बाजार 2008-09 के दौरान 12 लाख कारों का था जिसमें ए सेगमेंट की गाड़ियों की संख्या सबसे ज्यादा थी। बाजार हिस्सेदारी के बारे में सहगल ने कहा मारुति सुजुकी इंडिया के पास 40 फीसद या इससे थोड़ी ही कम हिस्सेदारी होगी जिसके बाद हुंदै दूसरे स्थान पर रहेगी।

इसके पास करीब 20 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। टोयोटा और होंडा की बाजार हिस्सेदारी भी ठीक ठाक रहेगी। फिलहाल मारुति की हिस्सेदारी सबसे अधिक 53 फीसद की है जिसके बाद 20 फीसद के साथ हुंदै दूसरे स्थान पर है।