भारत-कोलंबिया के बीच हाइड्रोकार्बन समझौता

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
देश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती देते हुए भारत ने कोलंबिया के साथ हाइड्रोकॉर्बन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा और भारत की यात्रा पर यहाँ पहुँचे कोलंबिया के ऊर्जा एवं खान मंत्री हरनान मार्टिनेज टोरस ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से दोंनों देशों के बीच पूरे हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में सहयोग बढे़गा।

इस अवसर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव आरएस पांडेय और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम के अध्यक्ष आरएस शर्मा तथा ओएनजीसी विदेश के प्रबंध निदेशक आरएस बुटोला भी उपस्थित थे।
देवड़ा ने कहा कि समझौते से दोंनों देशों के बीच तेल खोज एवं उत्पादन, उसका परिवहन, विपणन, रिफाइनरी, एलपीजी, एलएनजी सहित हाइड्रोकार्बन क्षेत्र की पूरी श्रृंखला में सहयोग बढे़गा।

ओएनजीसी विदेश लिमिटेड पहले ही कोलंबिया में तेल खोज के काम में लगी हुई है इस समझौते से सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की दूसरी कंपनियों के लिए भी सहयोग का रास्ता खुल जाएगा।
कोलंबिया के ऊर्जा मंत्री ने समझौते को दोंनों देशों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों के लिए कोलंबिया में कामकाज की बेहतर संभावनाएँ मौजूद हैं। रेल, सड़क, बंदरगाह और अन्य ढाँचागत परियोजनाओं में निवेश की अच्छी संभावनाएँ वहाँ मौजूद हैं।

कोलंबिया इन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों से निवेश का इच्छुक है। दक्षिण अमेरि‍की देश कोलंबिया हाइड्रोकार्बन के मामले में पाँचवाँ बड़ा देश है। यहाँ 525000 बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन होता है। कोलंबिया में कुल 1.54 अरब बैरल तेल का आरक्षित भंडार होने का अनुमान है।

ओएनजीसी की विदेश कारबार इकाई ओएनजीसी विदश ने कोलंबिया के केरिबेयन इलाके में गहरे समुद्र स्थित तीन ब्लॉक लिए थे। इससे पहले 2006 में चीन की साइनोपैक के साथ मिलकर तेल उत्पादक क्षेत्र में भागीदारी हासिल की। ओवीएल इस समय 17 देशों में काम कर रही है और 88 लाख टन तेल एवं गैस का उत्पादन कर रही है।




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