कुछ क्षेत्रों में रिश्तों को गति की जरूरत-ओबामा

वॉशिंगटन| भाषा| पुनः संशोधित सोमवार, 16 जुलाई 2012 (23:08 IST)
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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि और अमेरिका के रिश्तों में आई मजबूती पर उन्हें गर्व है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में इस को अधिक गति देने की जरूरत है


ओबामा पहले ही भारत के साथ रिश्ते को 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी करार दे चुके हैं। भारत के साथ रिश्ते से जुड़े एक सवाल पर ओबामा ने कहा, हां, यह सही है कि कुछ क्षेत्रों में हम अधिक गति देखना चाहते हैं। फिर भी मुझे परस्पर रिश्तों में हुई प्रगति पर गर्व है।

उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ता मजबूत, व्यापक तथा गहरा है। यह पहले कभी ऐसा नहीं रहा। दोनों देशों के बीच रिश्ते बिना चुनौतियों के नहीं हो सकते और भारत-अमेरिका रिश्ता भी कोई अपवाद नहीं है। ओबामा के मुताबिक साझा हितों के कारण दोनों देश आगे की ओर बढ़े हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहरे इस्तेमाल वाली अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से भारत को लंबे समय से उपेक्षित रखे जाने की व्यवस्था के अंत का स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि अमेरिका का रक्षा विभाग इसका समाधान निकालने के लिए काम कर रहा है।


ओबामा की ओर से यह भरोसा उस पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें दोहरे इस्तेमाल की प्रौद्योगिकी को लेकर दोनों देशों में मतभेद रहा है। इस प्रौद्योगिकी से भारत को वर्षों से उपेक्षित रखा गया है।
दोहरे इस्तेमाल की प्रौद्योगिकी से उपेक्षित रखे जाने के कारण भारत का रक्षा और अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रभावित हुआ। अमेरिका के कुछ हलकों में इस तरह की चिंता रही है कि इस तकनीक का इस्तेमाल सैन्य उदेश्यों खासकर परमाणु हथियार विकसित करने के कार्यक्रमों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

ओबामा ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) जैसी संस्थाओं में भारत की सदस्यता का समर्थन किया और कहा कि अमेरिका परमाणु उत्तरदायित्व कानून के बारे में अंतरराष्ट्रीय चिंताओं का समाधान भारत के साथ मिलकर करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुर्घटना की स्थिति में परमाणु संयंत्र संचालकों पर 1500 करोड़ रुपए का उत्तरादायित्व तय किए जाने से जुड़े भारतीय कानून के संदर्भ में यह बात कही। उन्होंने स्वीकार किया कि 2005 की भारत-अमेरिका परमाणु करार के कार्यान्वयन में प्रगति पर्याप्त रूप से तेज नहीं रही है।

दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग में परमाणु करार को आधारशिला करार देते हुए ओबामा ने कहा, निश्चित तौर पर करार के कार्यान्वयन में प्रगति उतनी तेज नहीं रही है, जितना दोनों देश चाहते थे, परंतु इस करार के पूर्ण कार्यान्वयन को लेकर मैं पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े एक सवाल पर ओबामा ने कहा कि भारत और अमेरिका इस देश (ईरान) को परमणु हथियार हासिल करने से रोकने के महत्व पर सहमत हैं।
भारत के साथ वॉशिंगटन के रिश्तों के संदर्भ में ओबामा ने कहा, हाल के दशकों में भारत की उल्लेखनीय प्रगति ने उसे वैश्विक अगुवा का रुतबा दिया है और मैं भारत के उदय के पूरे उत्साह से स्वागत करता हूं। अपने दिल्ली प्रवास के दौरान की गई घोषणाओं का स्मरण करते हुए ओबामा ने कहा, दोनों देश सच्चे वैश्विक सहयोगी हैं।

इसी कारण मैंने स्पष्ट किया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन करता है। भारत में अमेरिकी निवेश के संदर्भ में ओबामा ने कहा, मेरे पदभार संभालने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार 40 फीसदी से अधिक ऊपर गया है और इसमें लगातार प्रगति हो रही है। (भाषा)



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