शरीफ बंधुओं की उम्मीदवारी पर आपत्ति

इस्लामाबाद| भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013 (17:05 IST)
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इस्लामाबाद। के भ्रष्टाचाररोधी निकाय ने 11 मई के आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री तथा उनके भाई की उम्मीदवारी पर यह कहते हुए आपत्ति जताई है कि उन्होंने बैंक के साथ 3.48 अरब रुपए की धोखाधड़ी की है।


राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो ने गुरुवार को को भेजे एक आधिकारिक पत्र में यह मुद्दा उठाया है। ब्यूरो के अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि शरीफ बंधुओं तथा उनके रिश्तेदारों के खिलाफ इस समय रावलपिंडी की भ्रष्टाचार निरोधक में रिश्वत के 3 मामले लंबित हैं।
शरीफ बंधुओं पर आरोप है कि उन्होंने हुदाइबिया पेपर मिल्स के लिए लिया गया ऋण नहीं चुकाया। मुख्य विपक्षी दल पीएमएल एन के प्रमुख नवाज शरीफ तथा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ पर सत्ता का दुरुपयोग कर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जुटाने का भी आरोप है।

इस संबंध में दोनों के खिलाफ मार्च 2000 में भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में एक मामला भी दर्ज किया गया था। इन मामलों में शरीफ बंधुओं के कई रिश्तेदार भी आरोपी हैं जिनमें नवाज शरीफ का बेटा हुसैन नवाज, हमजा शाहबाज, शमीम अख्तर, सबीहा अब्बास, मरयम सफदर तथा इशहाक डार भी शामिल हैं।


पीएमएल (एन.) के एक प्रवक्ता ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ब्यूरो द्वारा लगाए गए आरोप ‘भ्रामक’ हैं। प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि ब्यूरो के अधिकारी पूर्ववर्ती पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की अगुवाई वाली सरकार के इशारे पर पीएमएल (एन.) नेताओं को निशाना बनाने के लिए इस प्रकार की कार्रवाई कर रहे हैं।
निर्वाचन आयोग ने हाल ही में ब्यूरो को 11 मई के आम चुनाव में उम्मीदवारों की जांच-पड़ताल के लिए बनाए गए तंत्र में शामिल किया है। शाहबाज शरीफ पंजाब असेम्बली के लिए चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं नवाज शरीफ नेशनल असेम्बली चुनाव के लिए मैदान में हैं। यदि पीएमएल (एन.) चुनाव जीतती है तो नवाज शरीफ देश के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं।
ब्यूरो ने उम्मीदवारों की जांच-पड़ताल के लिए विशेष चुनाव सेल बनाए हैं। निर्वाचन आयोग ने भ्रष्टाचार या गैरकानूनी धंधों में लिप्त रहने के आरोपी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से बाहर करने के लिए फेडरल ब्यूरो ऑफ रिवेन्यू, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान तथा नेशनल डाटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को साथ लिया है।

निर्वाचन आयोग कह चुका है कि कर चोरी करने वाले, बैंक ऋण अदा नहीं करने वाले और कर्जमाफी का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों को चुनाव से दूर रखा जाएगा। पाकिस्तान के इतिहास में ये चुनाव सत्ता का पहला लोकतांत्रिक हस्तांतरण होंगे। (भाषा)



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