हिलेरी और जूलिया ने की चूल्हे की वकालत

न्यूयॉर्क| भाषा|
और ने घरों में खाना बनाने के सुरक्षित तरीकों की वकालत की। दोनों ने यह बात विकासशील देशों में महिलाओं को धुआं रहित चूल्हे देने के संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कही।

‘यूएसए टूडे’ के संपादकीय पन्ने पर उन्होंने आज लिखा है, ‘सौभाग्य से स्वच्छ स्टोव बनाने के लिए तकनीक हमारे पास मौजूद है। कई कंपनियां उन्हें बना भी रही हैं। भारत, चीन और मैक्सिको जैसे देशों ने इनका अपने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है।’

साथ ही उन्होंने कहा कि मगर इनके इस्तेमाल की संख्या बहुत कम है क्योंकि इन्हें लोगों तक पहुंचाने की उचित कोशिश नहीं हुई है। साथ ही इन्हें विकासशील देशों में सस्ते दामों पर उपलब्ध करवाने की भी कोशिशें नहीं की गई हैं।
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में असुरक्षित तरीके से खाना पकाने से कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है और इनसे पर्यावरण को भी बहुत ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है।

लेखक ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया है कि अभी भी 3 अरब लोग लकड़ी, उपले, कोयले और उन्य चीजों से जलने वाले चूल्हों पर खाना पकाते हैं।
पर्यावरण सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इससे हवा सामान्य से 200 गुना ज्यादा प्रदूषित होती है। उनका मानना है कि इससे फेफड़े का कैंसर, न्यूमोनिया, मोतियाबिंद, जन्म के समय कम वजन होने की परेशानियों के साथ-साथ मौत तक हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक प्रत्येक साल इन चूल्हों और इनसे लगने वाली आग के कारण 20 लाख लोगों की मौत हो जाती है। मरने वालों में ज्यादातर संख्या महिलाओं और बच्चों की होती है। (भाषा)



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