इक यही बात न भूली...

न्यूयॉर्क (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित मंगलवार, 16 सितम्बर 2008 (23:42 IST)
घटना हो जाती है और मस्तिष्क में स्मृति बनकर दर्ज हो जाती है। आखिर यह स्मृति क्या होती है?
हाल ही में किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि मस्तिष्क के लिए याद करना गुजरे हुए पलों को फिर से जीने की तरह होता है।

साइंस डेली के अनुसार अनुसंधानकर्ताओं ने पहली बार स्मृति को तलब करने के सिलसिले में अलग-अलग मस्तिष्क कोशिकाओं का अध्ययन किया और पता लगाया कि मस्तिष्क किसी विशिष्ट अनुभव को स्मृति के तौर पर कहाँ संग्रह करता है तथा उसे दोबारा कैसे याद करता है।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रमुख अनुसंधानकर्ता डॉ. इत्जाक फ्रीड ने बताया स्मृति में छिपे पुराने अनुभव के पलों को फिर से जीना वास्तव में अतीत की तंत्रिका संबंधी गतिविधियों को पुनर्जीवित करना होता है।

डॉ. फ्रीड और इसराइल स्थित वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में उनके सहयोगियों ने मिर्गी के 13 मरीजों के मस्तिष्क का अध्ययन किया, जिनका अमेरिका के एक अस्पताल में ऑपरेशन के बाद इलाज किया जा रहा था।
डॉक्टरों ने इन मरीजों के मस्तिष्क में ऑपरेशन से पहले आघात के मूल स्थान का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रोड लगा दिए थे। यह ऐसे मामलों में अपनाया जाने वाला स्तरीय मानदंड है।

डॉ. फ्रीड ने इन इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल स्मृति बनने के दौरान होने वाली तंत्रिका संबंधी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए किया। इन मरीजों को कुछ वीडियो दिखाए गए और उनकी तंत्रिका संबंधी गतिविधियाँ रिकार्ड की गईं। बाद में मरीजों से वीडियो क्लिपिंग के अंश याद करने के लिए कहा गया।
इन गतिविधियों के आधार पर अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि उनके लिए यह पता करना आसान था कि मरीज कौन-सी वीडियो क्लिप को उसके बारे में बताने से पहले याद कर रहा था।

अध्ययन से यह भी पता चला कि रिकॉर्ड किए गए न्यूरॉन ही सक्रिय नहीं होते बल्कि ये तो एक विशाल स्मृति सर्किट के हिस्से होते हैं। इस सर्किट में हजारों कोशिकाएँ होती हैं, जो स्मृति संग्रहित करती हैं।
फ्रीड ने कहा कि इस अध्ययन से पहली बार यह पुष्टि हुई है कि पहली बार स्मृति तैयार की जाती है तब जो न्यूरॉन उत्तेजित होते हैं, उन्हीं न्यूरॉनों की गतिविधियाँ दूसरी या तीसरी बार उस स्मृति को ताजा करती हैं।

 

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