सुनो, छोटी-सी गुड़िया की लंबी कहानी

अजातशत्रु|
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बहुत लिखा जा चुका है गायिका पर। शास्त्रीय संगीत के शलाका-पुरुषों से लेकर छोटे-से अखबार के एक संकोची पत्रकार तक ने... अपने ढंग से लता के गायन और उसके प्रभाव पर, सोचा है और अपनी भाषा गढ़ी है। मगर विशेषणों की सारी फौज, उक्ति-वैचित्र्यों की तमाम बरसात और फंतासी भाषा की समस्त उड़ान के बावजूद लता-इफेक्ट इससे ज्यादा कुछ नहीं कहने देता कि लता की सुमधुर आवाज... प्रकृति का आश्चर्य है कि लता के गायन की सूक्ष्मता और भारी अपील... हैरानी से गूँगा कर देने वाली है।
* 'आज सोचा तो आँसू भर आए' देखिए कि यहाँ आवाज का ठहराव, अनुभूति की डूब और पत्थर की सी एकाग्रता कितनी गजब है। समूचा गीत यूँ पहाड़-सा सरकता चलता है, जैसे वेदना की आग में तपकर एक लाल-भम्म सलाई हमारे सीने को दागती चली जा रही हो। गीत क्या है! वेदना का खिसकता हुआ पाताल है।



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