आश्रम में बसा छोटा भारत

ND| पुनः संशोधित गुरुवार, 7 फ़रवरी 2008 (15:35 IST)
महर्षि चाहते थे कि उनके हर आश्रम में छोटा भारत बसे। जगदलपुर में भी उनका आश्रम है। दोनों ही जगहों पर यहाँ के अलावा आंध्रप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, नेपाल, असम और दूसरे राज्यों के भी बच्चे दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

आश्रम में उन्हीं बच्चों को रखा जाता है, जिनकी उम्र कम से कम 13 वर्ष और पाँचवीं कक्षा तक पढ़ाई की हो। पाण्डुका आश्रम में 150 बटुक वेदों, आयुर्वेद, ज्योतिष, अध्यात्म और योग की दीक्षा ले रहे हैं। व्यवस्थापक श्रीवास्तव ने बताया कि पूरी शिक्षा लेने में 12 से 14 साल लग जाते हैं।

बीटल्स का समर्प
अपने दौर का ख्यात म्युजिक ग्रुप बीटल्स 1968 में उनकी शरण में चला गया। जबकि पूरी दुनिया बीटल्स की दीवानी थी। भावातीत ध्यान में प्रशिक्षित होने के लिए बीटल्स ग्रुप भारत आया था। इसके बाद उन्होंने जो गीत लिखा था, वह महर्षि द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित था।
1975 तक आते-आते पश्चिमी दुनिया में उनका भावातीत ध्यान इतना लोकप्रिय हुआ था कि 13 अक्टूबर 1975 को टाइम पत्रिका ने अपने कवर पेज पर महर्षि महेश योगी चित्र सहित कवर स्टोरी छापी थी। शीर्षक था- 'ध्यान सारी समस्याओं का जवाब'।



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