डॉक्टर बनाने वाली परीक्षा

13 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे

WDWD
इस रविवार को होने वाली एआईपीएमटी की मुख्य परीक्षा देश के हजारों भावी डॉक्टर्स का भविष्य तय करने वाली है। जानकारी के मुताबिक स्क्रीनिंग में शामिल होने वाले 1 लाख 45 हजार प्रतिभागियों में से चुने गए करीब 13 हजार प्रतिभागी इस परीक्षा में शामिल होंगे। देशभर के तमाम कॉलेजों की करीब 3000 सीटों के लिए विद्यार्थियों को चुना जाएगा। प्रतिभागी किस तरह अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें और कैसे देशभर के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए सफलता हासिल करें यही बता रहे हैं एक्सपर्ट्‌स।

सफलता के नुस्खे:

. बचे दिनों में मॉक टेस्ट जरूर दें
. टाइम मैनेजमेंट सबसे ज्यादा जरूरी
. जो लिखें, कम शब्दों में साफ- सुथरा लिखें
. टाइम मैनेजमेंट सबसे ज्यादा जरूरी
. जो लिखें, कम शब्दों में साफ- सुथरा लिखें


ऐसे पहुँचें मंजिल तक

डाउट क्लियर कर ले

इस परीक्षा में समय को ध्यान में रखकर काम करना सबसे खास बात है। अतः अपनी बात को कम से कम शब्दों में अच्छी भाषा में कहने की कोशिश करना चाहिए। रैंकर्स पाइंट के निदेशक कमलकिशोर शर्मा बताते हैं पिछली कुछ परीक्षाओं में मैकेनिक्स, इलेक्ट्रिसिटी और मैग्नेटिज्म पर खासा जोर दिया गया है। अतः इस बार भी ऐसी संभावना बन रही है। प्रतिभागी इन चेप्टर्स को अच्छी तरह समझ लें और किसी भी प्रकार का संकोच ना रखें। छोटी-छोटी समस्याएँ असफलता का कारण साबित हो जाती हैं अतः डाउट क्लियर कर लें। ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करें ताकि परीक्षा हॉल में पूरे आत्मविश्वास के साथ पेपर हल किया जा सके।

थ्योरी है, प्रैक्टिस करें

इस परीक्षा में प्रतिभागियों को ज्यादा लिखना होता है। जिसकी प्रैक्टिस उन्हें नहीं होती। अतः उन्हें मॉक टेस्ट के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा तैयारी कर लेना चाहिए। जीएनजी क्लासेस के निदेशक डॉ. जीएस ठकराल ने कैमेस्ट्री की तैयारी की बारीकियों की ओर संकेत करते हुए बताया 6, 7 और 8 तारीख में प्रतिभागी कम से कम दो बार मॉक टेस्ट जरूर दें ताकि बेहतर प्रैक्टिस हो सकें। खुद की कमियाँ ढ़ूँढते हुए आत्मविश्वास रखें। यह पेपर अपेक्षाकृत लंबा होता है अतः टाइम मैनेजमेंट का ध्यान रखें। चार साल के पेपर्स के मुताबिक फिजिकल केमेस्ट्री, न्यूमेरिकल केमेस्ट्री आदि से संबंधित प्रश्नों का प्रतिशत ज्यादा होता है, अतः इन पर खासा ध्यान दें।

साइंटिफिक लैंग्वेज ह

ND|
इस विषय को लेकर ब्रेन मास्टर क्लासेस के निदेशक डॉ. पुनीत गुप्ता बताते हैं प्रतिभागियों को डायोग्रामेटिक प्रश्नों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए क्योंकि पिछले कुछ सालों से इस तरह के प्रश्नों का प्रतिशत बढ़ा है। हर टॉपिक की एक प्रॉपर डेफिनेशन होती है अतः उस पर गौर करें और हर प्रश्न को लिखने के लिए एनसीईआरटी की लैंग्वेज का उपयोग करें, ताकि पूरे अंक प्राप्त किए जा सकें। मार्फोलॉजी, पेडिग्री आदि यूनिट्स का प्रतिशत भी ज्यादा होता है अतः इन्हें भी विशेष महत्व दें। जो भी लिखें, कम शब्दों में साफ- सुथरा लिखें ताकि समय व्यर्थ ना जाए। हल किए गए प्रश्नों के सही होने की जाँच जरूर करें।




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