नेहा धूपिया : सही साबित हुआ फैसला

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नेहा धूपिया का मानना है कि उन्होंने कुछ वर्ष पहले अच्छे बैनर के साथ अच्छी करने का जो फैसला लिया था, वो अब सही साबित हुआ है। वे अपने की प्रगति से बेहद खुश हैं। वे अब रोल की लंबाई नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता पर यकीन करती हैं।

नेहा को अभी भी वे दिन याद हैं जब वे बी-ग्रेड की सेक्सी फिल्मों के बीच उलझ कर रह गई थीं। उस समय उन्हें महसूस हुआ कि यदि वे इस तरह की फिल्में करती रहीं तो उनका करियर जल्दी खत्म हो जाएगा।

नेहा ने फैसला किया कि वे केवल उन फिल्मों में ही अभिनय करेंगी जिनमें उन्हें कुछ कर दिखाने का अवसर मिले। सिर्फ नायिका बनने के लिए वे बी ग्रेड की फिल्मों में काम नहीं करेंगी। इस फैसले के बाद कुछ समय तक नेहा को ज्यादा फिल्में नहीं मिलीं, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें ऑफर मिलने लगे जिसका उन्होंने जमकर फायदा उठाया।

एक तरफ सिंह इज किंग, दे दना दन, चुप चुपके जैसी कमर्शियल फिल्मों में उन्होंने काम किया तो दूसरी ओर छोटे बजट की दस विदानियाँ, दस कहानियाँ, मिथ्या, रात गई बात गई, एक चालीस की लास्ट लोकल जैसी फिल्मों के जरिये उन्होंने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करवाई।

नेहा आज अपने करियर को देखती हैं ‍तो पाती हैं कि वे पहले के मुकाबले आज ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं।



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