कार बाजार मंदी से बेजार, डेढ़ लाख कर्मचारी बेरोजगार

नई दिल्ली| भाषा|
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नई दिल्ली। आर्थिक नरमी और सुस्त मांग के चलते वित्त वर्ष 2013-14 में देश में कारों की बिक्री में लगातार दूसरे साल 4.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान वाहन उद्योग में करीब 1.5 लाख कर्मचारियों की छंटनी भी हुई।


(सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2013-14 में घरेलू बाजार में कारों की बिक्री घटकर 17,86,899 इकाइयों पर आ गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 18,74,055 कारों की थी। वित्त वर्ष 2012-13 में देश में कारों की बिक्री में 6.69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
सियाम अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने यहां बताया कि पिछला साल वाहन उद्योग के लिए बहुत कठिन रहा। अर्थव्यवस्था में नरमी, ऊंची ब्याज दर, ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी आदि अनेक कारणों से गुजरे साल के दौरान वाहन कारोबार के लिए वातावरण काफी मुश्किलों से भरा रहा।


उन्होंने बताया कि वाहन की बिक्री कमजोर पड़ने से वाहन उद्योग के कर्मचारियों, मुख्य रूप से ठेका एवं नियमित कर्मचारियों की नौकरियां भी प्रभावित हुईं।

किर्लोस्कर ने कहा कि हालांकि सियाम ने इस दौरान वाहन उद्योग में छंटनी के शिकार लोगों के एकीकृत आंकड़े एकत्रित नहीं किए हैं, लेकिन मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि वाहन उद्योग से जुड़े अन्य धंधे जैसे कच्चा माल आपूर्तिकर्ता आदि क्षेत्रों को जोड़कर गुजरे साल इस उद्योग में करीब एक से डेढ़ लाख कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
बीते वित्त वर्ष के दौरान सभी प्रकार के वाहनों की बिक्री हालांकि 3.53 प्रतिशत बढ़कर 1,84,21,538 इकाइयों पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 1,77,93,701 इकाइयों की थी।

इस दौरान दोपहिया वाहनों की बिक्री 7.31 प्रतिशत बढ़कर 1,48,05,481 इकाइयों पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 1,37,97,185 वाहनों की थी।

इस दौरान मोटरसाइकलों की कुल बिक्री 3.91 प्रतिशत बढ़कर 1,04,79,817 वाहनों पर पहुंच गई, जो इससे पिछले साल की इसी अवधि में 1,00,85,000 वाहनों की थी।
इसी प्रकार स्कूटरों की बिक्री भी 23.24 प्रतिशत बढ़कर 36,02,744 इकाइयों पर पहुंच गई, जो इससे पिछले साल 29,23,424 इकाइयों की थी।

आलोच्य वित्त वर्ष में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री हालांकि 20.23 प्रतिशत घटकर 6,32,738 वाहनों पर आ गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 7,93,211 वाहनों की थी।

किर्लोस्कर ने बताया कि विकास परियोजनाओं के बुनियादी ढांचा निर्माण में अड़चनों, खनन प्रतिबंध और अर्थव्यवस्था में नरमी के रुख से वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री प्रभावित हुई। (भाषा)



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