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Written By कमलेश सेन

आजादी के 75 साल : भारत-चीन युद्ध, लालबहादुर शास्त्री का निधन

वर्ष 1957 में देश को आजाद हुए 11 वर्ष हो गए थे और यह अंक भारतीय संस्कृति में भी शुभ माना जाता है। भारत में मुद्रा में आना व पाई इस तरह से मुद्रा का चलन था। इसी साल दशमलव पद्धति को अपनाया गया और यह इकाई का रूप सभी गणितों में मान्य हो गया। इसी वर्ष देश में दूसरे आम चुनाव संपन्न हुए। इन चुनावों में कांग्रेस को पुन: बहुमत मिला और पं. जवाहरलाल नेहरू दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए। इसी वर्ष अटलबिहारी वाजपेयी पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।
 
वर्ष 1958 में देश ने फिर एक कीर्तिमान स्थापित किया। हॉकी में स्वर्ण पदक जीतने और एशियाड खेलों से खेलों के प्रति देश में एक विशेष भावना ने जन्म लिया और बंगाल के मिहिर सेन ने इंग्लिश चैनल पार कर पहले भारतीय के साथ एशिया के पहले नागरिक होने का तमगा प्राप्त किया।
 
स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने वर्ष 1959 में स्वतंत्र पार्टी का गठन किया। सत्तारूढ़ दल की नीतियों के विरोध के चलते राजगोपालाचारी ने स्वतंत्र पार्टी का गठन किया था। इसी साल सितंबर माह में भारत में टेलीविजन की शुरुआत हुई और इसने 'टेलीविजन इंडिया' के नाम से कुछ समय के लिए शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित किए थे। मार्च माह में तिब्बत से दलाई लामा भारत आए थे। इसी वर्ष आरती साहा ने इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने वालीं पहली महिला तैराक का खिताब हासिल किया था।
 
वर्ष 1960 में महाराष्ट्र राज्य का जन्म हुआ और इसकी राजधानी बंबई (अब मुंबई) को बनाया गया, जो आज देश की आर्थिक राजधानी के नाम से पहचानी जाती है, साथ ही हिन्दी फिल्मों से जुड़े हर मामले का मुख्य स्थान भी है।
 
वर्ष 1961 में गोवा और उसके आसपास के द्वीपों के लिए महत्वपूर्ण रहा। गोवा इस वर्ष पुर्तगाली कब्जे से मुक्त हुआ था। इसी वर्ष प्रबंधन की पढ़ाई के लिए उच्च शिक्षा संस्थान भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद की नींव रखी गई थी।
 
वर्ष 1962 में देश में तीसरे आम चुनाव संपन हुए। इन चुनावों में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला और पं. जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए। इसी वर्ष 5 सितंबर से डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिवस के दिन को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाए जाने का श्रीगणेश हुआ था।
 
पं. नेहरू की विदेश नीति की कठिन परीक्षा का दौर चल रहा था कि तिब्बत के दलाई लामा को देश में शरण देने के बाद से चीन नाराज चल रहा था। वह किसी न किसी तरह विवाद की राह में था। अंतत: अक्टूबर 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया। यह भारत के लिए सर्वाधिक कठिन संकट का दौर था। 'हिन्दी-चीनी भाई-भाई' के नारे का यह हमला मजाक था।
 
संसद में नेहरू की विदेश नीति की काफी आलोचना हुई और भारतीय सेना की तैयारियों पर भी प्रश्न खड़े होने लगे। आखिर देश के तत्कालीन रक्षामंत्री वीके कृष्णमेनन में चीन से पराजय के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। चीन ने भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा कर 20 नवंबर 1962 को एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी थी।
 
1963 के वर्ष के दूसरे महीने में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का निधन हो गया था। 1962 के चीन से युद्ध में देश का विदेशी मुद्रा भंडार काफी कम हो जाने से वर्ष 63 में स्वर्ण नियंत्रण कानून सरकार ने लागू किया जिसमें 14 कैरेट्स अधिक के शुद्ध आभूषण निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।
 
1964 का साल देश के लिए भारी उथल-पुथल का रहा। इस साल देश की वामपंथी विचारधारा की पार्टी में विभाजन हो गया। कम्युनिस्ट पार्टी के भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी 2 अलग-अलग दल बन गए। देश के लिए मई का माह दुःखद रहा। 27 मई 1964 को पं. जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया।
 
पं. नेहरू, महात्मा गांधी के सहयोगी और देश के पहले प्रधानमंत्री थे और उनके नेतृत्व में लगातार 3 आम चुनाव कांग्रेस ने जीते थे। 1962 में चीन के साथ युद्ध में नेहरू की असफलता के बाद भी वे लोकप्रिय थे। उनके निर्देशन में देश में विकास का एक मॉडल बना जिस पर उन्नति की ओर देश ने कदम अग्रसर किए।
 
नेहरूजी ने कई विश्वप्रसिद्ध पुस्तकों का लेखन भी किया है। नेहरूजी के निधन से देश में शोक की लहर व्याप्त हो गई। ऐसा लगा कि भारतीय राजनीति में शून्यता आ सकती है और तरह-तरह की आशंकाएं व्यक्त की गईं। नेहरूजी बच्चो में काफी लोकप्रिय थे। गुलजारीलाल नंदा को कार्यवाहक प्रधानमत्री बनाया गया था और लालबहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बनाए गए।
 
1965 का साल फिर देश के लिए पड़ोसी से विवाद का रहा है। भारत और पाकिस्तान में कश्मीर को लेकर विवाद आरंभ से ही बना हुआ था। जिसे लेकर फिर विवाद हुआ और अगस्त-सितंबर में भारत-पाक युद्ध हुआ। इस युद्ध में दोनों देशों को काफी नुकसानी का सामना करना पड़ा था। कच्छ के रण क्षेत्र में विवाद और पाकिस्तान के तरह-तरह के आरोपों का सामना भारत ने किया। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा युद्धविराम की घोषणा के साथ युद्ध शांत हुआ। इस युद्ध में पाकिस्तान की सेना को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था।
 
वर्ष 1966 भी पिछले सालों की तरह देश के लिए उथल-पुथलभरा रहा। भारत और पाकिस्तान के मध्य हुए युद्ध के सिलसिले में वार्ता के लिए लालबहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के अय्यूब खान के मध्य सोवियत संघ के ताशकंद में एक समझौता हुआ और वहां पर शास्त्रीजी का स्वास्थ्य एकाएक खराब हुआ और उनका निधन हो गया।
 
शास्त्रीजी देश के लिए आशा की किरण थे जिनका निधन हो गया। आपने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया था। इस कठिन दौर में देश की बागडोर श्रीमती इंदिरा गांधी को कांग्रेस ने सौंपी और वे देश की प्रधानमंत्री बनीं। इससे पूर्व वे कांग्रेस प्रेसीडेंट और सूचना और प्रसारण मंत्री थीं।
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