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आजादी के समय क्रांतिकारी जिस पुस्तकालय में तय करते थे रणनीति, आज वही अपने अस्तित्व की लड़ रहा लड़ाई

शनिवार,अगस्त 13, 2022
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पूरे देश में भय का माहौल था। कोरोना महामारी के चलते आर्थिक गतिविधियां संकट के दौर में पहुंच गईं। कई लोगों को नौकरी से हटा दिया गया व कई लोग बेरोजगार हो गए। धीरे-धीरे महामारी का प्रभाव कुछ कम हुआ और प्रतिबंध कम किए जाने लगे। भारतीय जनता पार्टी के ...
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आजादी के बाद भारत को हॉकी के बाद पहला मेडल दिलाने वाला खेल कुश्ती का था। लेकिन क्रिकेट और हॉकी की बेतहाशा लोकप्रियता के कारण एकल खेल जैसे कुश्ती, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, टेनिस, बॉक्सिंग को उतनी लोकप्रियता नहीं मिली जितनी उनको मिलनी चाहिए
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मानवरहित अंतरिक्ष यान 'चंद्रयान प्रथम' श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया। मुंबई में समुद्री मार्ग से पाकिस्तानी आतंकवादी होटल ताज में प्रवेश कर गए और गोलीबारी की जिससे कई लोग मारे गए। सेना ने मुक्ति अभियान चलाकर एकमात्र ...
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ली। मई माह में दूसरी बार भारत द्वारा पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया। अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा। देश की पहली निजी टेलीफोन सेवा एयरटेल आरंभ। मदर टेरेसा का कोलकाता में निधन।
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भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की श्रीलंका यात्रा और वहां पर शांति स्थापित करने के लिए शांति समझौता किया गया। इसके विरोध में श्रीलंका के सैनिक द्वारा राजीव गांधी पर हमला कर दिया गया और वे बच गए। भारतीय फिल्मों के अभिनेता-निर्माता राजकपूर का निधन ...
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जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में इंदिराजी की सत्ता को उखाड़ने के संकल्प और संपूर्ण क्रांति के उद्घोष के चलते सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर जनता पार्टी का गठन किया और 77 के आम चुनाव में पहली बार देश में गैर कांग्रेसी सरकार केंद्र में काबिज हुई। ...
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वर्ष 1967 देश के लोकतंत्र के लिए एक नई लहर का साल था। देश के ख्यात नेता पं. जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल एवं लालबहादुर शास्त्री का निधन हो चुका था और देश में चौथे आम चुनाव का वक्त आ गया था। चुनाव में कांग्रेस का जनाधार कम हुआ और कुछ राज्यों में ...
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1957 में देश को आजाद हुए 11 वर्ष हो गए थे और यह अंक भारतीय संस्कृति में भी शुभ माना जाता है। भारत में मुद्रा में आना व पाई इस तरह से मुद्रा का चलन था। इसी साल दशमलव पद्धति को अपनाया गया और यह इकाई का रूप सभी गणितों में मान्य हो गया। दूसरे आम चुनाव ...
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14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त 1947 को भारत को नए राष्ट्र के रूप में स्वतंत्रता प्रदान की गई। इन्हीं तारीखों को पाकिस्तान और भारत अपना आजादी दिवस मनाते हैं। भारत में पं. जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। पलायन और हिंसा ने ...
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व के पहले हिन्दी पोर्टल वेबदुनिया की विशेष प्रस्तुति 'कल, आज और कल' की सराहना की है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हर्ष का विषय है कि हिन्दी न्यूज पोर्टल वेबदुनिया आजादी की 75वीं वर्षगांठ के ...
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गजल, ठुमरी, दादरा हो या नृत्‍य कलाएं। साहित्‍य हो या चित्रकला। ये सब महाराजाओं के सभाकक्षों में उनके मनोरंजन के साधन हुआ करते थे। ऐसा नहीं है कि यह प्रश्रय गलत था, राजाश्रय की वजह से उस दौर में कला और कलाकारों का सम्‍मान भी बहुत होता था। कलाकारों को ...
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स्‍त्री लेखन पर तो मुझे लगता है कि कुछ लोगों का महिलाओं को मुख्‍य धारा में नहीं आने देने का कोई षड़यंत्र था। इसलिए उन्‍होंने महिलाओं से कहा कि वो एक गोला बना रखा है, जाओ, उसमें जाकर खेलो। यही दलितों के साथ लेखन में हुआ। हालांकि वहीं मनु भंडारी की ...
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लोक-गायन कर रहे कलाकार अपने दम पर ही जिंदा है, उन्‍हें किसी तरह की सरकारी मदद नहीं मिलती। हमारे सिस्‍टम में कहीं भी लोक-कलाओं, लोक-संस्‍कृति और कलाकारों के संवर्धन में दिलचस्‍पी नजर नहीं आती। सीधे-सादे बंजारा और कबिलाई संस्‍कृति के कलाकार अपनी ...
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उत्तर भारत के प्रमुख पीठों में शुमार जहां तक इस पीठ की आजादी की लड़ाई में योगदान की बात है तो करीब 100 साल से देश की हर राजनीतिक एवं सामाजिक घटना में अपना प्रभाव छोड़ने वाली गोरखपुर की गोरक्षपीठ भी इससे अछूती नहीं रही। उस समय देश का जो माहौल था, यह ...
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किसी भी देश का विकास वहां के लोगों के विकास से सम्बद्ध होता है। निरंतर प्रगति करती इस दुनिया में जिस प्रकार तकनीक ने हमारे दैनिक जीवन में प्रतिक्षण हस्तक्षेप किया है, उसी प्रकार आवश्यक है कि हम भी विज्ञान और प्रोद्योगिकी को आत्मसात करें –
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लगभग दो दशकों तक अपने भोजपुरी गायन से बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बिहार का नाम रौशन करने वाले व्यास शैली के बेजोड़ लोकगायक जंगबहादुर सिंह आज 102 वर्ष की आयु में गुमनामी के अंधेरे में जीने को विवश हैं। भोजपुरी के विकास का दंभ भरने वाली ...
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आधुनिकता का हौवा ज़्यादा है। उसका आतंक फैला है। हर मनुष्य आधुनिक होना चाहता है बिना यह जाने कि वह है क्या। यह कुछ इस तरह है कि आप एक रेल में सवार होना चाहते हो बिना यह जाने कि वह जा किधर रही है। इसलिए नहीं कि आपको कहीं जाना है, बल्कि उस रेल का आतंक ...
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धनवंती उर्फ गुलाबो सपेरा सांपों के साथ नाचते-नाचते अंतरराष्ट्रीय स्तर की कलाकार बन गईं। उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राजस्थान का कालबेलिया नृत्य और गुलाबो एक दूसरे का पर्याय बन गए। इस नृत्य को उन्होंने ‍न सिर्फ जिया बल्कि देश की सीमाओं से ...
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'कल, आज और कल' इन तीन शब्दों के भीतर कैसे समेटते हैं भारत के अतीत की स्मृतियां, उपलब्धियां, वर्तमान की समस्याएं, संकट और समाधान, और क्या हैं उनकी नजर में भविष्य की संभावनाएं, चुनौतियां, विश्वास और संकल्प...
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