वेबदुनिया : ऑनलाइन पत्रकारिता के 19 वर्ष

Last Updated: बुधवार, 26 सितम्बर 2018 (12:55 IST)
इस तरह हुई की शुरुआत 
वेबदुनिया का औपचारिक शुभारंभ 23 सितंबर, 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्द्रकुमार गुजराल ने किया था। लेकिन, इसके पीछे थी वेबदुनिया टीम की अनथक और कड़ी मेहनत। पोर्टल के पहले संपादक प्रकाश हिन्दुस्तानी के नेतृत्व में साथियों ने नींद और भूख की परवाह किए बिना लगातार काम किया। कई-कई दिन वे घर नहीं गए। उन्होंने कार्यस्थल पर ही लगातार काम कर विश्व के पहले हिन्दी पोर्टल के शुभारंभ को अंजाम तक पहुंचाया। वक्त के साथ वेबदुनिया के परिवार में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, गुजराती  और अंग्रेजी के पोर्टल भी जुड़े। 
 
आपकी भाषा में आपका डाकिया- ई-पत्र
जिस समय किसी ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि इंटरनेट पर हिन्दी अथवा अन्य भारतीय भाषाओं में ई-मेल भेजा जा सकता है, तब वेबदुनिया ने ई-पत्र के माध्यम से 1998 में पहले हिन्दी फिर 10 अन्य भारतीय भाषाओं में ई-मेल सेवा की शुरुआत की थी। ई-पत्र दुनिया का पहला ट्रांसलिटरेट इंजन था, जिसके माध्यम से व्यक्ति रोमन में टाइप कर अपनी भाषा में अपना संदेश भेज सकता था। ई-पत्र पैड के माध्यम से वेबदुनिया ने ऑफलाइन भी यह सुविधा उपलब्ध करवाई थी, जिससे व्यक्ति ऑफलाइन भी अपनी भाषा में टाइप कर सकता था। कम्प्यूटर की भाषा में कहें तो यह कॉमन इंटरनेट ऑफलाइन यूटिलिटी सुविधा थी। 
 
इस तरह बना विश्व का पहला हिन्दी सर्च इंजन
इंटरनेट पर खबरें, आलेख आदि सामग्री हिन्दी में भी ढूंढी जा सकती है, इसकी शुरुआत का श्रेय भी वेबदुनिया के खाते में ही दर्ज है। पोर्टल की शुरुआत के मात्र दो वर्षों के भीतर विश्व का पहला हिन्दी सर्च इंजन वेबदुनिया ने बनाया। साहित्यकार और कहानीकार अशोक चतुर्वेदी के नेतृत्व में वेबदुनिया की सर्च टीम ने इसे बखूबी अंजाम दिया। आज जब हम समाचार या आलेख के साथ जरूरी की-वर्ड डाल देते हैं, यह तरीका बहुत आसान भी है। लेकिन उस दौर में हर खबर और आलेख के लिए अलग इंटरफेस के जरिए की-वर्ड डालना होता था। यह काफी परिश्रम वाला काम था, लेकिन इसी टीम की बदौलत शुरू हुआ विश्व का पहला हिन्दी सर्च इंजन।
 
फ़ोनेटिक की-बोर्ड- वेबदुनिया की तकनीकी दक्षता
फ़ोनेटिक की-बोर्ड वेबदुनिया की तकनीकी दक्षता को ही दर्शाता है। जब किसी ने इंटरनेट पर अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में टाइप करने के बारे में सोचा भी नहीं था, तब वेबदुनिया ने फोनेटिक की-बोर्ड के माध्यम से हिन्दी समेत अन्य भारतीय भाषाओं में टाइप करने की सुविधा प्रदान की।
 
इस तरह हुई चैटिंग की शुरुआत... ई-वार्ता
उस दौर में चैटिंग करना स्वर्ग की अप्सराओं से बात करने जैसा था और इस पर चर्चा करना दुनिया की सबसे रोचक चर्चा भी मानी जाती थी। इसके किस्से और कहानियां बहु‍त ही रोचक और रोमांचक होते थे। इससे इंटरनेट की दुनिया में कार्यक्षमता बढ़ी और कार्य आसान होने लगा। किसी फाइल का रूट पूछने के लिए फोन करने की आवश्यकता नहीं थी और कोई खबर भेजने के लिए फैक्स की जरूरत नहीं थी। सब कुछ बहुत ही झटपट होता था। 
 
इस दौर में वेबदुनिया ने कई प्रयोगों में एक नया प्रयोग किया और वह यह कि चैट के माध्यम से देश के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल और जनता दल (यू) नेता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से भारत के लोगों की सीधी बात कराई जाए। इस विचार को वेबदुनिया ने 29 सितंबर 2000 को चैट का आयोजन कर मूर्तरूप भी दे दिया। देशभर से हजारों लोगों ने दोनों से सीधे सवाल पूछे। यह बहुत ही रोमांचक था। पहले सिर्फ पत्रकार ही सवाल पूछते थे, लेकिन यह कमाल का अनुभव था कि देश की आम जनता भी सीधे नेताओं से सवाल पूछ सकती थी। उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी से भी चैट के माध्यम से लोगों ने बात की। आजकल तो गूगल हैंगआउट का जमाना है। 
 
पहला ई-कॉमर्स- भाई को भेजा बहना का प्यार
आज के दौर में ई-कॉमर्स काफी लोकप्रिय हो रहा है। लोगों का रुझान ऑनलाइन शॉपिंग की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ...लेकिन वेबदुनिया ने ई-कॉमर्स की शुरुआत तब की थी, जब इसके बारे में कोई बहुत अधिक नहीं जानता था। 21वीं सदी की शुरुआत में वेबदुनिया ने भाई-बहन के रिश्ते में और मिठास बढ़ाने का काम किया। आमतौर पर तब रक्षाबंधन के मौके पर बहनें अपनी राखियां डाक अथवा कोरियर से भेजती थीं, लेकिन विदेशों में भेजना तो और भी दुष्कर था। ऐसे में वेबदुनिया ने विदेशों में रह रहे भाइयों के लिए न सिर्फ राखियां बल्कि मिठाई का पैकेट, हल्दी, कुमकुम और चावल भी नाममात्र के शुल्क पर पहुंचाया।
 
इलाहाबाद कुंभ- अध्यात्म और आईटी का संगम
21वीं सदी के पहले इलाहाबाद महाकुंभ में वेबदुनिया के सौजन्य से अध्यात्म और आईटी का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। उस समय वेबदुनिया ने देश-विदेश में मौजूद भारतीयों के लिए इलाहाबाद कुंभ से जुड़ी जानकारियों से अवगत कराया। इनमें समाचार, कुंभ का इतिहास, आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व से लेकर कुंभ के आकर्षक फोटो भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाए। महाकुंभ में वेबदुनिया का सबसे आकर्षक था 'ऑनलाइन स्नान' अथवा 'वर्चुअल स्नान'। उस समय इसे लोगों ने काफी सराहा था।
 
अत: यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इंटरनेट पर भाषायी क्रांति के लिए नए-नए रास्ते तलाशने का श्रेय वेबदुनिया को ही जाता है, जिन पर आज देश और दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां चल रही हैं।
 
वेबदुनिया के सफर में 'मील के पत्थर'
यूं तो वेबदुनिया परिवार से समय-समय पर कई साथी जुड़े, कई नई मंजिल की तलाश में आगे भी बढ़ गए। उनमें से कई आज भी इस यात्रा में हमसफर बने हुए हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिन्दुस्तानी को वेबदुनिया का पहला संपादक होने का गौरव प्राप्त है। इनके बाद वेबदुनिया टीम का नेतृत्व रवीन्द्र शाह (दिवंगत) ने संभाला। उसी दौर में किशोर भुराड़िया ने मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) की जिम्मेदारी संभाली। शाह के बाद मनीष शर्मा संपादकीय प्रभारी बने। उनके बाद यह महती उत्तरदायित्व जयदीप कर्णिक ने संभाला, जो वर्तमान में भी वेबदुनिया के संपादक हैं। पंकज जैन वर्तमान में वेबदुनिया के प्रेसीडेंट तथा सीओओ हैं। उपर्युक्त सभी दिग्गजों के कुशल नेतृत्व का ही परिणाम है कि वेबदुनिया आज इस मुकाम पर है। 



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