Hanuman Chalisa

योग के प्रत्याहार को साधने से आप बन जाएंगे शक्तिशाली

Updated: सोमवार, 20 जून 2016 (17:28 IST)
अष्टांगयोग का पाँचवाँ अंग प्रत्याहार है। वासनाओं की ओर जो इंद्रियाँ निरंतर गमन करती रहती हैं, उनकी इस गति को अपने अंदर ही लौटाकर आत्मा की ओर लगाना या स्थिर रखने का प्रयास करना प्रत्याहार है। जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को समेट लेता है उसी प्रकार इंद्रियों को इन घातक वासनाओं से विमुख कर अपनी आंतरिकता की ओर मोड़ देने का प्रयास करना ही प्रत्याहार है।

पाँच इंद्रियाँ है आँख, नाक, कान, जीभ और स्पर्श। आँख देखती है, कान सुनते हैं, नाग सूँघती है, जीभ स्वाद लेती है और त्वचार से स्पर्श का अनुभव होता है। जब हम उक्त पाँचों इंद्रियों के माध्यम से अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं तो इच्छाएँ और बलवान होने लगती है क्योंकि असलियत में इच्छा हमारा मन ही करता है। मन ही देखना, सुनना और स्पर्श करना चाहता है। इंद्रिया तो सिर्फ माध्यम है।

पाँचों इंद्रियों द्वारा व्यक्ति अपनी वासनाओं की पूर्ति करता रहता है। असल में इंद्रियाँ बाहरी नॉलेज का माध्यम होती है जिसके द्वारा हम सुरक्षा और सुविधा से जी सके लेकिन व्यक्ति जब उक्त पाँचों इंद्रियों का दुरुपयोग करना शुरू करता है तो संपूर्ण उर्जा बाहर की ओर बहने लगती है और बार-बार ऐसा करने से शरीर और मस्तिष्क का क्षरण होता रहता है।

उर्जा के बाहरी गमन को रोकर उसे भीतर की ओर मोड़ देना ही प्रत्याहर कहलाता है। प्रत्याहार में हम अपनी इंद्रियों को साधते हैं। अर्थात जब इंद्रियों की जरूरत होती है, तब इनका प्रयोग करते हैं, अन्यथा तो इन्हें शांत रखते हैं।

उर्जा के इस बाहरी गमन को रोकने के लिए सर्वप्रथम मन को साधना होता है क्योंकि ये इंद्रियाँ मन की इच्छा-वासनाएँ पूरी करते-करते कमजोर हो जाती हैं। प्रत्याहार में हम इंद्रियों के स्वामी बनने का प्रयास करते हैं। फिलहाल तो मन और इंदियाँ हमें चलाते हैं, फिर जब हम इसे साधते हैं तो इंद्रियाँ और मन के स्वामी बनकर हम इन्हें चलाते हैं।

क्या है वासनाएँ : काम, क्रोध, लोभ, मोह यह तो मोटे-मोटे नाम हैं, लेकिन व्यक्ति उन कई बाहरी बातों में रत रहता है जो आज के आधुनिक समाज की उपज हैं जैसे शराबखोरी, सिनेमाई दर्शन और चार्चाएँ, अत्यधिक शोरपूर्ण संगीत, अति भोजन जिसमें माँस भक्षण के प्रति आसक्ति, महत्वाकांक्षाओं की अंधी दौड़ और ऐसी अनेक बातें जिससे क‍ि पाँचों इंद्रियों पर अधिक भार पड़ता है और अंतत: वह समयपूर्व निढाल हो बीमारियों की चपेट में आ जाती है।

बाहरी गमन के नुकसान : आँख रूप को, नाक गंध को, जीभ स्वाद को, कान शब्द को और त्वचा स्पर्श को भोगती है। भोगने की इस वृत्ति की जब अति होती है तो इस सबसे मन में विकार की वृद्धि होती है। ये भोग जैसे-जैसे बढ़ते हैं, इंद्रियाँ सक्रिय होकर मन को विक्षिप्त करती रहती हैं। मन ज्यादा व्यग्र तथा व्याकुल होने लगता है, जिससे शक्ति का क्षय होता है।

कैसे साधे प्रत्याहार को : इंद्रियों को भोगों से दूर करने तथा इंद्रियों के रुख को भीतर की ओर मोड़कर स्थिर रखने के लिए प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। प्राणायाम के अभ्यास से इंद्रियाँ स्थिर हो जाती हैं। सभी विषय समाप्त हो जाते हैं। अतः प्राणायाम के अभ्यास से प्रत्याहार की स्थिति अपने आप बनने लगती है। दूसरा उपाय है रोज सुबह और शाम पाँच से तीस मिनट का ध्यान। इस सबके बावजूद अदि आपके भीतर संकल्प है तो आप संकल्प मात्र से ही प्रत्याहार की स्थिति में हो सकते हैं। हालाँकि प्रत्याहार को साधने के हठयोग में कई तरीके बताए गए हैं।

प्रत्याहर के लाभ : यम, नियम, आसन और प्राणायम को साधने से प्रत्याहार स्वत: ही सध जाता है। इसके सधने से व्यक्ति का एनर्जी लेवल बढ़ता है। पवित्रता के कारण ओज में निखार आता है। किसी भी प्रकार के रोग शरीर और मन के पास फटकते तक नहीं हैं। आत्मविश्‍वास और विचार क्षमता बढ़ जाती है, जिससे धारणा सिद्धि में सहयोग मिलता है। खासकर यह अनंत में छलाँग लगाने के लिए स्वयं के तैयार होने की स्थिति है।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

जीना सीखिए

Friendship Day 2026: अपने बेस्ट फ्रेंड के लिए 5 यूनिक गिफ्ट आइडिया, नया ट्रेंड हो रहा वायरल

Friendship Day 2026: कैसे दोस्तों के दोस्त बन जाते हैं जिंदगी के सबसे पक्के दोस्त?

गाली पर इतना बवाल क्यों? भाषा बिगड़ रही है, या समाज का असली चेहरा सामने आ रहा है?

कागज से नहीं, भ्रांतियों से बचने की आवश्यकता है

अगला लेख