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Women’s day: पुरुषों ने कहा, महिलाओं को हल्‍के में न लें, ये हमारी बपौती नहीं हैं

मंगलवार,मार्च 9, 2021
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बहुत मन होता है कि दिवस के बहाने कुछ सकारात्मक सोचें, मगर जब चारों ओर दहेज, बलात्कार, अपहरण, हत्या, आत्महत्या, छेड़छाड़ प्रताड़ना, शोषण, अत्याचार, मारपीट, भ्रूण हत्या और अपमान के आंकड़े बढ़ रहे हों तो महिला प्रगति किन आंखों से देखें?
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महिला दिवस 2021 विशेष : श्मशान.. यह शब्द सिहरन पैदा करता है, वैराग्य को जन्म देता है, भयभीत कर देता है.. लेकिन जीवन का यथार्थ है यह, जिसका सामना हर उस व्यक्ति को करना है जिसने जन्म लिया है.... भारतीय संस्कृति में इस स्थान से स्त्रियों को उनके कोमल ...
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भारत की महिलाओं की स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। महिलाओं के साथ हुए अन्‍याय को लेकर काम करने वाली संस्था ब्रेकथ्रू इंडिया ने बायस्टेंडर बिहेवियर के साथ यह स्टडी जारी की है।
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हम बात उनकी नहीं कर रहे हैं जो सफलता के प्रतिमान गढ़ चुकी हैं, हम उनकी भी बात नहीं कर रहे हैं जो कीर्तिमान रच रही हैं, हम उनकी भी बात नहीं कर रहे हैं शिखर पर परचम लहरा रही हैं.... हम बात कर रहे हैं उनकी जो ना अधिकार जानती है न प्रतिकार... जो सिर्फ ...
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भोपाल में मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी में एग्रीकल्चर की असिस्टेंट ‌प्रोफेसर साक्षी भारद्वाज ने अपने पर्यावरण के प्रति प्रेम और जुनून के चलते अपने महज 800 स्क्वायर फीट की जगह में 450 किस्म के 4 हजार पौधों का एक सेल्फ सस्टेंड गार्डन बना डाला और जिसका ...
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बडी विडंबना है भगवान तेरी इस बहुरूपिया जन्नत में। जहां एक ओर कठपुतली की तरह ढील है और एक ओर तान रखा है। जी हां, आप-हम पुन: स्वयं को याद दिला रहे हैं कि 'तुम महिला हो' जिसकी तुम्हें बधाई हो। क्यों हम स्वयं इस खूबसूरत बेइज्जती को बड़ी ही शिद्दत से ...
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मैं भी आयशा ही हूं लेकिन जिंदा आयशा... तुम्हारे और मेरे नसीब में ज्यादा फर्क नहीं है। वही सब कुछ मेरे साथ भी हुआ जो तुम्हारे साथ हुआ। वही दहेज, वही शौहर की बेवफाई, वही घर की औरतों के ताने, वही बार बार की मांग और बार-बार मायके से ससुराल, ससुराल से ...
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भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘वेबदुनिया’ आपको उन महिलाओं से मिलवा रहा है जिन्होंने अपनी लगन और परिश्रम के बल पर न केवल अपने जीवन में एक खास मुकाम हासिल किया बल्कि आज देश-दुनिया में एक रोल मॉडल के तौर पर भी जानी पहचानी जा रही है।
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1917 में पहले विश्व युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने ब्रेड और पीस के लिए हड़ताल की थी। महिलाओं ने अपनी हड़ताल के दौरान अपने पतियों की मांग का समर्थन करने से भी मना कर दिया था और उन्हें युद्ध को छोड़ने के लिए राजी किया था।
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हाल ही फोर्ब्स ने दुनिया की सबसे शक्तिशाली 100 महिलाओं की सूची में भारत की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, एचसीएल एंटरप्राइज की सीईओ रोशनी नादर मल्होत्रा और बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ को शामिल किया गया।
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ठीक इसी तरह 11.7 प्रतिशत महिलाएं विज्ञान, तकनीक, मार्केटिंग और गेम्स के श्रेत्रों में आपस में जुड़ने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं। इसमें बैंगलोर, चेन्नई और हैदराबाद सबसे आगे हैं।
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ऐसी बेटियां नजर आती हैं जिन्‍होंने जल, थल और नभ तीनों जगह अपना परचम लहराया और आज गर्व के साथ समूचा देश उनका नाम लेता है। जैसे भारतीय वायुसेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट शि‍वांगी सिंह राफेल उड़ाने वाली पहली महिला है। प्रिया झिंगन थल सेना में पहली महिला ...
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गगनदीप सिंग नाम के ट्विटर यूजर ने यह वीडियो शेयर किया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे महिला पुलिस कॉन्स्टेबल प्रियंका अपनी गोद में बेबी को लिए ट्रैफिक कंट्रोल कर रही हैं। वीडियो को शेयर कर लिखा गया है:
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आइए सलाम करें नारी की अदम्य इच्छाशक्ति को... उसके जीवट को... विषम हालात में जीने की उसकी मजबूती को.... महिला दिवस पर वेबदुनिया की विशेष प्रस्तुति....
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महिला दिवस का औचित्य तब तक प्रमाणित नहीं होता जब तक कि सच्चे अर्थों में महिलाओं की दशा नहीं सुधरती। महिला नीति है लेकिन क्या उसका क्रियान्वयन गंभीरता से हो रहा है। यह देखा जाना चाहिए कि क्या उन्हें उनके अधिकार प्राप्त हो रहे हैं। वास्तविक सशक्तीकरण ...
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वामा साहित्य मंच इंदौर शहर से संचालित प्रबुद्ध महिलाओं का जानामाना साहित्य समूह है। वर्तमान में देश-विदेश और अन्य शहरों की महिला साहित्यकार इससे जुड़ रही हैं।
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आप चाहे गृहिणी ही क्यों न हो, लेकिन आपका व्यक्तित्व भी दमदार होना चाहिए, क्योंकि आप पूरा घर और घर के सभी सदस्यों को संभालती हैं, इसलिए आप होम मैनेजर हैं।
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8 मार्च को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संपूर्ण विश्व की महिलाएं देश, जात-पात, भाषा, राजनीतिक, सांस्कृतिक भेदभाव से परे एकजुट होकर इस दिन को मनाती हैं।
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आज की बदली हुई तथा अपेक्षया अनुकूल परिस्थितियों में नारियां स्वयं को बदलने और पुरुष-प्रधान समाज द्वारा रचित बेड़ियों से स्वयं को आजाद करवाने हेतु कृतसंकल्प हैं। अब प्रश्न यह है कि नारी कितना बदले और क्यों? इसी बात की विवेचना हम इस निबंध में करेंगे।
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