Hanuman Chalisa

Vat Savitri Vrat: 30 मई 2022 को वट सावित्री अमावस्या पर कैसे करें पूजन, पढ़ें आसान विधि

Updated: रविवार, 29 मई 2022 (09:32 IST)
इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर्व 30 मई 2022 को मनाया जा रहा है। यह व्रत अखंड सौभाग्य पाने के लिए जाना जाता है। महिलाओं का वट सावित्री अमावस्या के दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। हिन्दू धर्म में वट सावित्री अमावस्या सौभाग्यवती स्त्रियों का महत्वपूर्ण पर्व है। इस व्रत को ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक तथा ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक करने का विधान है।
 
मान्यता है कि वट सावित्री व्रत करने से पति दीर्घायु और परिवार में सुख शांति आती है। पुराणों के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है। इस व्रत में बरगद वृक्ष चारों ओर घूमकर सौभाग्यवती स्त्रियां रक्षा सूत्र बांधकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। वट सावित्री व्रत में ‘वट’ और ‘सावित्री’ दोनों का खास महत्व माना गया है। पीपल की तरह ही वट या बरगद वृक्ष का भी विशेष महत्व है। इस व्रत को सभी प्रकार की स्त्रियां यानी कुमारी, विवाहिता, कुपुत्रा, सुपुत्रा, विधवा आदि करती हैं। इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं। आजकल अमावस्या को ही इस व्रत का नियोजन होता है। इस दिन वट (बड़, बरगद) का पूजन होता है। 
 
वट सावित्री अमावस्या पूजा विधि-Vat Savitri Vrat puja vidhi 
 
 - वट सावित्री अमावस्या के दिन प्रात:काल घर की सफाई कर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें।
 
 - तत्पश्चात पवित्र जल का पूरे घर में छिड़काव करें।
 
 - इसके बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्मा की मूर्ति की स्थापना करें।
 
 - ब्रह्मा के वाम पार्श्व में सावित्री की मूर्ति स्थापित करें।
 
 - इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान तथा सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करें। इन टोकरियों को वटवृक्ष के नीचे ले जाकर रखें।
 
 - इसके बाद ब्रह्मा तथा सावित्री का पूजन करें।
 
अब निम्न श्लोक से सावित्री को अर्घ्य दें-
 
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान्‌ पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।
 
 - तत्पश्चात सावित्री तथा सत्यवान की पूजा करके बड़ की जड़ में पानी दें।
 
इसके बाद निम्न श्लोक से वटवृक्ष की प्रार्थना करें-
 
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।
 
 - पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करें।
 
 - जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर 3 बार परिक्रमा करें।
 
 - बड़ के पत्तों के गहने पहनकर वट सावित्री की कथा सुनें।
 
 - भीगे हुए चनों का बायना निकालकर, नकद रुपए रखकर सासुजी के चरण स्पर्श करें।
 
 - यदि सास वहां न हो तो बायना बनाकर उन तक पहुंचाएं।
 
 - वट तथा सावित्री की पूजा के पश्चात प्रतिदिन पान, सिन्दूर तथा कुमकुम से सौभाग्यवती स्त्री के पूजन का भी विधान है। यही सौभाग्य पिटारी के नाम से जानी जाती है। सौभाग्यवती स्त्रियों का भी पूजन होता है। कुछ महिलाएं केवल अमावस्या को एक दिन का ही व्रत रखती हैं।
 
 - पूजा समाप्ति पर ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि वस्तुएं बांस के पात्र में रखकर दान करें।
 
अंत में निम्न संकल्प लेकर उपवास रखें -
 
मम वैधव्यादिसकलदोषपरिहारार्थं ब्रह्मसावित्रीप्रीत्यर्थं
सत्यवत्सावित्रीप्रीत्यर्थं च वटसावित्रीव्रतमहं करिष्ये।
 
 - इस वट वृक्ष के नीचे सावित्री-सत्यवान की कथा को पढ़ने अथवा सुनने से मनोवांछित सुफल की प्राप्ति होती है।

 वट सावित्री व्रत 2022 : अखंड सौभाग्य का वरदान देता है वट वृक्ष, जानिए वटवृक्ष की 12 विशेषताएं

Show comments

सभी देखें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

सभी देखें

Guru Purnima 2026: इन 5 गुरुओं की पूजा से मिलेगा ज्ञान, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद

24 July Birthday: आपको 24 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 24 जुलाई 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

Ashadha Purnima 2026: आषाढ़ी पूर्णिमा कब है, जानिए इस दिन का खास महत्व

अगला लेख