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घर में गार्डनिंग का शौक हैं तो जान लीजिए पौधों से जुड़े ये गोल्डन वास्तु रूल्स

Updated: शुक्रवार, 5 जून 2026 (10:23 IST)
Vastu compliant gardening: भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं माना गया है, बल्कि इन्हें सुख, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर, कार्यालय या किसी भी स्थान पर सही दिशा में उचित पौधों का रोपण करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यही कारण है कि आज के समय में 'ग्रीन वास्तु' का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।ALSO READ: वास्तु के अनुसार घर में रखी ये 5 चीजें बढ़ाती हैं राहु का अशुभ प्रभाव
 
ग्रीन वास्तु गाइड हमें बताती है कि कौन-सा पौधा किस दिशा में लगाना शुभ माना जाता है, कौन-से पौधे आर्थिक उन्नति और पारिवारिक सुख-शांति का कारण बनते हैं तथा किन पौधों को घर में लगाने से बचना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार तुलसी, मनी प्लांट, अशोक, बांस, शमी और केले जैसे पौधे विशेष ऊर्जा प्रदान करते हैं और जीवन में सफलता के नए अवसर लेकर आते हैं।
 

अगर आप भी अपने घर में गार्डनिंग का शौक रखते हैं, तो पौधों से जुड़े ये 'गोल्डन वास्तु रूल्स' जरूर जान लें।

 

पौधारोपण के शुभ नक्षत्र और नियम

बेस्ट नक्षत्र: स्वाति, उत्तरा, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र में लगाया गया पौधा कभी निष्फल नहीं होता और तेजी से बढ़ता है। संभव हो तो अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार रोपण करें।
 
शुभ समय: हमेशा शुक्ल पक्ष की अष्टमी से कृष्ण पक्ष की सप्तमी के बीच में ही नए पौधे लगाएं।
 
स्थानांतरण का नियम: अगर किसी पेड़ को हटाना बेहद जरूरी हो, तो केवल माघ या भाद्रपद महीने में ही उसे हटाएं और 3 महीने के भीतर उसकी जगह नया पौधा लगाने का संकल्प लें।
 

मेन गेट और छाया के जरूरी नियम

द्वार वेध से बचें: घर के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने कभी कोई पौधा न लगाएं। बड़े पेड़ों को हमेशा मुख्य द्वार की ऊंचाई से तीन गुना दूरी पर लगाना चाहिए।
 
धूप-छाया का गणित: सुबह 9:00 AM से दोपहर 03:00 PM तक किसी भी बड़े पेड़ की परछाई आपके घर पर नहीं पड़नी चाहिए।
 
स्मार्ट टिप: पौधों को हमेशा पहले मिट्टी के गमले में तैयार करें, उसके बाद ही जमीन में रोपें।
 

ग्रहों का पेड़-पौधों से कनेक्शन

वास्तु के अनुसार, हर वनस्पति पर किसी न किसी ग्रह का राज होता है:
 
सूर्य: ऊंचे, मजबूत और कठोर तने वाले पेड़ (जैसे शीशम)।
 
चंद्रमा और शुक्र: दूध वाले पौधे (जैसे देवदार) और सुंदर लताएं/बेल।
 
बृहस्पति (गुरु): सभी फलदार वृक्ष।
 
बुध: बिना फल वाले हरे-भरे पेड़।
 
शनि: कमजोर, सूखे और रसहीन पेड़।
 
राहु-केतु: कंटीली झाड़ियां।
 
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