भवन बनाने योग्य भूमि का कैसे करें चयन, जानिए 12 काम की बातें...


* वास्तुशास्त्र से जानिए किस भूमि पर बनाएं अपना भवन, तो मिलेगी सुख-समृद्धि...
 
 
भारतीय संस्कृति में वृक्षों का अपना महत्वपूर्ण स्थान रहा है। आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक ने भी वातावरण की शुद्धता के लिए विशेष वृक्षों का महत्व बताया है। अंततोगत्वा भूमि पर उत्पन्न होने वाले वृक्षों के आधार पर किया जाता है। 
 
* जिस भूमि पर पपीता, आंवला, अमरूद, अनार, पलाश आदि के बहुत हों वह भूमि, वास्तुशास्त्र में बहुत श्रेष्ठ बताई गई है। 
 
* घर के समीप कांटेदार वृक्ष होने से शत्रु भय होता है। कांटेदार आदि वृक्षों को काट कर उनकी जगह अशोक, पुन्नाग व शमी रोपे जाएं तो उपर्युक्त दोष नहीं लगता है।
 
* दूध वाला वृक्ष घर के समीप होने से धन का नाश होता है। 
 
* फल वाले वृक्ष घर के समीप होने से संतति का नाश होता है। इनके काष्ठ भी घर पर लगाना अशुभ हैं। 
 
* जिन वृक्षों पर फूल आते रहते हैं और लता एवं वनस्पतियां सरलता से वृद्धि करती हैं इस प्रकार की भूमि भी वास्तुशास्त्र में उत्तम बताई गई है। 
 
 



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