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स्नेहिल मुस्कान से बच्चों के बीच कुछ अलग ही नजर आते CM योगी, स्कूल में एडमिशन हो या अवैध कब्जा हटाना, हर समस्या के प्रति संजीदा

Updated: सोमवार, 19 जनवरी 2026 (20:54 IST)
सख्त, अनुशासन प्रिय, अपराध-अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई कराने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी स्नेहिल मुस्कान से बच्चों के बीच कुछ अलग ही नजर आते हैं। उनके सामने बच्चे भी बेहिचक अपनी पसंदीदा चीजों की मांग करते हैं और उनसे घुल-मिल जाते हैं। बच्चों के साथ झलकता सीएम योगी का बालप्रेम उनके कोमल हृदय और सर्वसुलभ होने का प्रमाण भी प्रस्तुत करता है। बच्चों से जुड़ाव ने सीएम योगी के प्रति समाज का भरोसा बढ़ाया है।
 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों व जरूरतमंदों से कनेक्ट होना उनकी सख्त छवि वाले व्यक्तित्व के मानवीय पहलू को प्रदर्शित करता है। यह यूपी की 25 करोड़ जनता में सीएम योगी के प्रति भरोसा कायम करता है। योगी का यह भावनात्मक रिश्ता उन्हें समाज के हर वर्ग से जोड़ता है। 
 
‘जनता दर्शन’ में सोमवार को आई नन्ही बच्ची, मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर समेत अनेक अवसरों पर बच्चों से सीएम योगी के संवाद के अलग-अलग दृश्य देखने को मिलते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और जवाब सुनकर ठहाका लगाना, मन को गुदगुदाने वाला एक मासूम पल था। यह सीएम का बच्चों से जुड़ाव दिखाता है। यूं तो योगी आदित्यनाथ की पहचान सख्त, अनुशासनप्रिय और निर्णायक प्रशासक की रही है। अपराधियों के खिलाफ उनके कड़े तेवर, बुलडोजर कार्रवाई और प्रशासनिक सख्ती तो हर कोई जानता है। लेकिन, इससे अलग बच्चों से संवाद, उनके भविष्य को लेकर संवेदनशील पहल और समस्याओं पर त्वरित निर्णय से तस्वीर का दूसरा पहलू भी दिखाई देता है, यहां मुख्यमंत्री एक दयालु संवेदनशील संरक्षक तथा बालप्रेम की भावनाओं से ओतप्रोत व्यक्ति के रूप में सामने आते हैं।
 
गोरखपुर का वायरल वीडियो या ‘जनता दर्शन’ में सोमवार को दो साल की अनन्या से संवाद महज कुछ मामले नहीं हैं, योगी आदित्यनाथ के बच्चों के प्रति स्नेह और संवेदनशीलता के कई उदाहरण सामने आए हैं। बीते 31 दिसंबर को मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी परेशानी बताई थी। जिस पर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर यानी साल के पहले ही दिन मामला हल कराया। मुख्यमंत्री से मुलाकात के 24 घंटे के भीतर न सिर्फ उनका मकान कब्जा मुक्त कराकर उन्हें लौटाया गया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर व तत्काल गिरफ्तारी भी हुई। सीएम की संवेदनशीलता व भावनात्मकता को प्रकट करता यह मामला संदेश देता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुशासन, कानून व्यवस्था, बच्चों और कमजोर वर्गों से संबंधित मामलों में तनिक भी देरी नहीं करते। 
 
कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी भी किसी से छिपी नहीं है। मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी जिद, अकेले पैदल लखनऊ पहुंच जाने की जानकारी जब सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली तो उन्होंने उसे बुलाया। उसके बनाए चित्रों को स्वीकार किया और उसके शिक्षित व सुरक्षित भविष्य का आश्वासन दिया। संरक्षक और प्रदेशवासियों के मुखिया के रूप में उनकी इस भूमिका की भूरि-भूरि प्रशंसा हुई। यह अनुभव खुशी और उसके माता-पिता के लिए जीवन भर की पूंजी बन गया। 
 
‘जनता दर्शन’ के जरिए कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का स्कूल में एडमिशन कराना भी सीएम योगी की संवेदनशीलता का हिस्सा है। कानपुर की नन्ही मायरा ने कहा था कि मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूं। इस पर सीएम ने तत्काल उसका प्रवेश कराने का निर्देश दिया। वाची ने कहा कि मैं पढ़ना चाहती हूं, इस पर सीएम ने उसका भी प्रवेश कराया। गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराने के साथ ही उसे पुनः विद्यालय भेजना सुनिश्चित कराया। 
 

बूढ़ी मां के दर्द को सुन द्रवित सीएम योगी ने कैंसर पीड़ित बेटे को भिजवाया अस्पताल

29 सितंबर को लगे जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास कानपुर के रायपुरवा निवासी बूढ़ी मां अपने बेटे का दर्द लेकर पहुंची थीं। उनका दर्द सुन सीएम द्रवित हो गए और तत्काल उनके कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाया और बेहतर इलाज प्रारंभ कराया। सीएम की यह संवेदनशीलता उन्हें समाज से जोड़ती है। 

 

चंदौली के दिव्यांगों को मिली ‘रोशनी’, जनता दर्शन में ही सुनिश्चित कराई गई पेंशन 

17 अप्रैल के जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता दिखी। जब उन्होंने अपने हाथ से दो दिव्यांगजनों (राजेश व चंद्रशेखर) को इलेक्ट्रॉनिक सेंसरयुक्त स्टिक दीं और उन्हें इसका उपयोग करना सिखाया। मुख्यमंत्री ने चंदौली से आए एक दिव्यांग की समस्या सुनकर संबंधित अधिकारी को निर्देश देते हुए तत्काल केवाईसी कराई और अविलंब दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ दिलाना सुनिश्चित कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाल प्रेम, संवेदनशीलता और समाज से उनके जुड़ाव को प्रदर्शित करते हैं।
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