CIBIL : आखिर क्या होता है सिबिल स्कोर, आम आदमी के लिए कितना जरूरी
What is CIBIL score how important is it for a common man : Cibil score को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने लोकसभा में सिबिल स्कोर को लेकर मोदी सरकार का घेराव किया। उन्होंने सिबिल स्कोर को लेकर आम आदमी को होने वाली परेशानी को लेकर सरकार से सवाल पूछा। कार्ति ने सिबिल स्कोर अपडेट करने वाली संस्था पर भी सवाल दागे। तो जानते हैं आखिर क्या होता है सिबिल स्कोर और इसे कौनसी संस्था अपडेट करती है।
पहले जानते हैं क्या होता है सिबिल स्कोर (Cibil score) : यदि आपको किसी को बड़ी रकम उधार देनी हो तो आप यह देखेंगे कि पैसा वापस मिलने में कोई परेशानी तो नहीं होगी। क्या सामने वाला इतना सक्षम है कि वह पैसा लौटा देगा। उसका ट्रैक रिकॉर्ड कैसा है। क्या इससे पहले उसने रुपया उधार लिया है तो वापस कितने दिनों में दिया। क्या वापस देने में कोई आना-कानी तो नहीं की। यदि किश्तों में पैसा वापस किया है तो क्या किश्त सही समय दी या नहीं। यह बातें आप सोचेंगे। यही सब बातें सिबिल स्कोर के दौरान आती हैं। बैंक से लोन लेने में सिबिल स्कोर का जिक्र आता है।
क्या निर्धारित होता है सिबिल स्कोर : क्रेडिट इनफॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड (सिबिल) को अब ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड नाम से जाना जाता है। यह एक क्रेडिट ब्यूरो है और इसे एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी कहते हैं। ये लोगों के साथ-साथ कंपनियों की क्रेडिट से जुड़ी गतिविधियों के रिकॉर्ड को रखती है। इसमें क्रेडिट कार्ड से लेन-देन और उसका क्लीरेंस और लोन तथा लोन की वापसी की समीक्षा शामिल हैं।
सिबिल स्कोर यानी क्रेडिट प्रोफाइल : सिबिल स्कोर ग्राहक की क्रेडिट हिस्ट्री के बारे में बताता है। बता दें कि यह स्कोर तीन अंकों का होता है। अब तक तो यह साफ हो गया होगा कि यह किसी व्यक्ति की ऋण लेने और उसे चुकाने की काबिलियत को मापने का तरीका है। यानि यह क्रेडिट प्रोफाइल है। सिबिल रिपोर्ट (CIBIL Report) में उन सभी लोन की पूरी जानकारी होती है जिसे किसी ने लिया है। इनमें होम लोन, ऑटो लोन, क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, ओवरड्राफ्ट सुविधा आदि शामिल होते हैं। सिबिल रिपोर्ट में दी गई क्रेडिट हिस्ट्री का इस्तेमाल करते हुए सिबिल स्कोर बनाया जाता है।
कौन तैयार करता है : तमाम क्रेडिट ब्यूरो सिबिल स्कोर को जारी करते हैं। इनमें ट्रांसयूनियन सिबिल, इक्विफैक्स, एक्सपेरियन और सीआरआईएफ हाईमार्क जैसी क्रेडिट इंफर्मेशन कंपनियों को प्रमुख माना गया है। इन कंपनियों को लोगों के वित्तीय रिकॉर्ड इकट्ठा करने, इसे मेंटेन करने और इस डेटा के आधार पर क्रेडिट रिपोर्ट / क्रेडिट स्कोर जेनरेट करने का लाइसेंस प्राप्त है। ये क्रेडिट ब्यूरो बैंक और अन्य फाईनेंस संस्थान के पास जमा ग्राहक के डेटा जैसे बकाया लोन राशि, पुनर्भुगतान रिकॉर्ड, नए लोन / क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन और अन्य क्रेडिट संबंधी जानकारी आदि को लेकर उनका मूल्यांकन करते हैं और उसके आधार पर सिबिल स्कोर को तैयार करते हैं।
समझ से परे स्कोर का घटना और बढ़ना : इस स्कोर के घटने या बढ़ने का राज आजतक किसी को समझ नहीं आया, क्योंकि समय पर लोन चुकाने के बावजूद भी ये स्कोर कम हो सकता है। इसके तय किए गए स्कोर के खिलाफ कोई अपील या शिकायत का विकल्प भी नहीं है और ये सिस्टम पूरी तरह से प्राइवेट कंपनियों के हाथ में है जिस पर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है।
जल्दी हो जाता है लोन अप्रूवल : सिबिल स्कोर की रेंज 300 से 900 के बीच होती है। किसी व्यक्ति को 300 से 900 के बीच के नंबर दिए जाते हैं। सिबिल स्कोर 900 के जितना करीब होता है, उतना ही अच्छा होता है। यह जितना अच्छा होता है लोन का अप्रूवल उतनी आसानी से और जल्दी हो जाता है। Edited by : Sudhir Sharma
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