आखि‍र कैसे बने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा पूर्ण राज्य?

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Last Updated: शुक्रवार, 21 जनवरी 2022 (18:00 IST)
पांच दशक पहले भारत के उत्तरपूर्व (North East) के राज्यों में एक बड़ा फेरबदल हुआ था। 21 जनवरी 1972 को मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय नाम के तीन राज्यों का गठन हुआ था।

आजादी के बाद इन राज्यों का भारत में विलय देश के गणतंत्र में हो चुका था। लेकिन तब ये तीनों हिस्से स्वतंत्र राज्य नहीं बने थे। लेकिन 1972 में पूर्वोत्तर (पुनर्गठन) 1971 के तहत 21 जनवरी 1972 को तीन राज्य मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा राज्य अस्तित्व में आए थे।

दरअसल, मेघालय का गठन पुराने असम राज्य के दो जिलों को मिला कर किया गया था। एक जिला खासी पहाड़ों और जयंतिया पहाड़ों से मिल कर बना था तो वहीं दूसरा जिला गारो पहाड़ों से बना था।

इन्हें मिला कर ही मेघालय का गठना 21 जनवरी 1972 को हुआ था। इसका क्षेत्रफल 22430 वर्ग किलोमीटर है। इसकी सीमा ऊपर में असम और नीचे बांग्लादेश से मिलती है।

मेघालय आजादी से काफी समय पहले से ही असम का हिस्सा था। मेघालय की खासी गारो और जयंतिया जनजातियों के अपने राज्य हुआ करते थे।

19वीं सदी में ये तीनों ब्रिटिश प्रशासन के अंतर्गत आ गए। 1905 में बंगाल विभाजन के बाद मेघालय पूर्वी बंगाल और असम का हिस्सा हो गया 1912 में यह विभाजन खत्म हो गया और मेघालय असम में आ गया था।

आजादी के बाद भी मेघालय असम का हिस्सा रहा, लेकिन 1960 से इसके अलग राज्य की मांग उठी। 1969 में यह अलग राज्य तो बना, लेकिन अपनी खुद की विधान सभा वाला संपूर्ण राज्य 1972 में ही बन सका। आज भारत मे सबसे ज्यादा बारिश होने वाली जगहें मेघालय में ही हैं।

20वीं सदी में 1940 के दशक में मणिपुर और उसकी राजधानी इम्फाल की बहुत अहमियत रही। द्वितीय विश्व युद्ध में मणिपुर और खासतौर से इंफाल की बहुत ज्यादा रणनीतिक अहमियत थी।

जापानियों ने सबसे पहले इसे ही अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया था। उनकी यहां नाकामी ही द्वितीय विश्व युद्ध में एशिया के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुई थी। आजादी के बाद मणिपुर भारत से जुड़ा रहा, लेकिन इसका भारत में पूर्ण विलय 1949 में हुआ।



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