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मध्य पूर्व में फिर महायुद्ध का खतरा, पूरे क्षेत्र में फैल सकती है तबाही, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व को फिर से गहरे संकट की ओर खींचा जा रहा है और यदि ऐसा हुआ तो इसके दुष्परिणाम व्यापक क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकते हैं। उन्होंने इस सप्ताह वहां हुए हमलों और निरन्तर बिगड़ती स्थिति से उपजी चिन्ताओं के बीच सुरक्षा परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही है।
हमलों और जवाबी हमलों की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच जारी शान्ति वार्ता पर गम्भीर जोखिम मंडरा रहा है और अप्रैल के शुरुआती दिनों में लड़ाई रोकने पर हुई सहमति के बाद युद्धविराम फिर से अनिश्चितता के घेरे में है। इस पृष्ठभूमि में जून महीने के लिए यूएन सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष देश कोलम्बिया ने बुधवार को यह उच्चस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें हिंसक टकराव, मानवीय आपात स्थिति और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़ी चिन्ताओं और राजनीतिक समाधानों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
यूएन प्रमुख ने कहा कि मुझे गहरी चिन्ता है कि इन घटनाओं से हिंसक टकराव फिर पूरी तरह से भड़क सकता है। यूएन प्रमुख ने 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधियों को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम अब भी नाज़ुक स्थिति में है और पिछले कुछ दिनों में हमलों और बयानबाज़ी में तेज़ी आई है।
उनके अनुसार, हमें कम स्तर पर हिंसा के पूर्ण हिंसक टकराव में बदल जाने के जोखिम को कम करके नहीं आंकना चाहिए। लगभग चार महीने पहले संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल ने 28 फ़रवरी को ईरान पर बमबारी शुरू की थी, जिसके बाद ईरान ने अपने जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमले किए, जिससे मध्य पूर्व क्षेत्र में गहरा संकट व्याप्त हो गया था।
अमेरिका और ईरान के बीच नाज़ुक हालात में युद्धविराम लागू होने के बावजूद, पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी व्याप्त है और हाल के कुछ दिनों में फिर से हमले हुए हैं। यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि कूटनीतिक समाधान और व्यापक युद्धविराम की दिशा में एक साथ मिलकर प्रयास करने होंगे।
इस क्रम में उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रयासों के फलस्वरूप इसराइल और लेबनान के बीच हो रही वार्ता का स्वागत किया। महासचिव ने सभी पक्षों से वर्तमान समझौतों का सम्मान करने का भी अनुरोध किया है। बस अब और हमले नहीं। बस अब और बहाने नहीं।
खाड़ी क्षेत्र में हालात पर चिंता
यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि लेबनान में इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच लड़ाई मार्च 2026 में भड़की थी, जिसकी वजह से 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, सैकड़ों लोग मारे गए हैं और देश के दक्षिणी हिस्से में व्यापक पैमाने पर नुक़सान हुआ है। हिंसा में कम से कम 7 शान्तिरक्षक भी मारे गए हैं।
महासचिव ने चेतावनी दी है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाज़ों की आवाजाही पर पाबन्दी जारी रहने की वजह से ऊर्जा व उर्वरक क़ीमतों में उछाल दर्ज किया गया है, सप्लाई चेन में व्यवधान आया है और खाद्य असुरक्षा की स्थिति बिगड़ी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि युद्धविराम का सम्मान किया जाना होगा, दुनिया पूर्ण रूप से युद्धविराम लागू होते देखना चाहती है और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप आवाजाही के अधिकारों व स्वतंत्रता को बहाल किया जाना होगा।
मार्च महीने में लड़ाई के दौरान, अमेरिका और इसराइल ने ईरान के अनेक शहरों पर बमबारी की थी, जिसके जवाब में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान समेत अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन व मिसाइल हमले किए, जिनमें तेल व गैस प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया था।
