सम्बंधित जानकारी
- मार्केट कैप में भारत को लगा बड़ा झटका! राजेश एक्सपोर्ट्स में 15 लाख करोड़ का फर्जीवाड़ा; शेयर बाजार के लिए कैसा रहेगा अगला हफ्ता?
- होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान के बीच भारी टकराव! US ने मार गिराए 4 ड्रोन, रडार साइट्स भी तबाह
- लेबनान पर इजराइली हमलों से भड़का ईरान, अमेरिका से वार्ता रोकने की दी चेतावनी
- ईरान का दावा- 'बुशहर में गिराया अमेरिकी विमान', भड़का अमेरिका; क्या खटाई में पड़ेगा 60 दिनों का युद्धविराम?
- Top News 29 May: हमीरपुर में पुल गिरने से 6 की मौत, ईरान-अमेरिका में बढ़ा तनाव, आसाराम का सरेंडर
ईरानी संपत्तियों से खाड़ी देशों को मुआवजा देने पर विचार कर रहा अमेरिका, तनाव के बीच बढ़ी हलचल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अब ईरान की विदेशों में मौजूद संपत्तियों का इस्तेमाल खाड़ी देशों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए करने पर विचार कर रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव के तहत ईरानी हमलों से प्रभावित देशों को न केवल भविष्य में होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकती है, बल्कि पहले हुए नुकसान का भी मुआवजा दिया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अधिकारियों को यह आकलन करने का निर्देश दिया है कि ईरान से जुड़े हमलों के कारण खाड़ी देशों को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है और क्या ईरानी संपत्तियों का उपयोग उसकी भरपाई के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन ईरानी परिसंपत्तियों पर विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव केवल अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई संपत्तियों तक सीमित नहीं है।
लेबनान में भी जारी है संघर्ष
सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। लेबनान की सेना के अनुसार, देश के दक्षिणी हिस्से में एक सैन्य वाहन पर इजरायली हमले में दो अधिकारियों समेत तीन सैनिकों की मौत हो गई। वहीं इजरायल ने कहा है कि वह इस घटना की जांच कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल मुआवजे के लिए करता है, तो इससे पहले से तनावपूर्ण अमेरिका-ईरान संबंधों में और अधिक कड़वाहट आ सकती है और पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है।
युद्धविराम के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी है। शनिवार तड़के अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य स्थित गोरुक और क़ेश्म द्वीप पर ईरानी तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई समुद्री मार्गों के लिए खतरा माने गए ईरानी ड्रोन को रोकने के बाद की गई।
इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, सात बैलिस्टिक मिसाइलें आबादी वाले इलाकों के ऊपर से गुजरीं, जिससे कुछ भौतिक नुकसान हुआ, लेकिन किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। वहीं बहरीन में सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि हमले अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए, जबकि अमेरिकी सेना का कहना है कि छह मिसाइलों को बीच रास्ते में ही मार गिराया गया और एक अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रही।
बातचीत की कोशिशें जारी, पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका
सैन्य तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे, जहां वे पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के लिए विशेष संदेश लेकर गए। ईरानी मीडिया के अनुसार, दोनों देशों के बीच गतिरोध खत्म करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान अब भी विदेशों में जमी अपनी अरबों डॉलर की संपत्तियों तक पहुंच, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी रणनीतिक स्थिति को लेकर आश्वासन चाहता है। इससे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता के एक सलाहकार ने कहा था कि अमेरिका में फ्रीज किए गए लगभग 24 अरब डॉलर के ईरानी फंड की रिहाई किसी भी शांति समझौते का अहम हिस्सा होगी। Edited by : Sudhir Sharma
