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कांग्रेस-झामुमो के भारी विरोध के बावजूद नथवाणी का नामांकन मंजूर, मुकाबला हुआ त्रिकोणीय

Jharkhand Rajya Sabha elections
Jharkhand Rajya Sabha elections Parimal Nathwani: एक तरफ मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की आपत्ति के बाद कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हो गया, वहीं दूसरी ओर झारखंड में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कड़े विरोध और गंभीर आपत्तियों के बाद आखिरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी का नामांकन मंजूर कर लिया गया है।

क्या थे नथवाणी पर आरोप?

परिमल नथवाणी के नामांकन दाखिल करने के बाद विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई थी। कांग्रेस विधायक नमन बिक्सल कोंगारी ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने नथवाणी के नामांकन पत्रों पर बेहद गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। कांग्रेस का आरोप था कि गुजरात के बड़े व्यवसायी परिमल नथवाणी ने अपने चुनावी हलफनामे में उन कंपनियों की जानकारी छिपाई है, जिनमें वे बतौर निदेशक (डायरेक्टर) जुड़े हुए हैं।
 
विपक्षी दलों ने उनके दस्तावेजों में नाम के उल्लेख को लेकर भी विसंगति होने का दावा किया था। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए नथवाणी के नामांकन को अस्थाई रूप से लंबित (पेंडिंग) रख दिया था, जिससे एनडीए खेमे में बेचैनी बढ़ गई थी।

भाजपा का पलटवार और नथवाणी की सफाई

कांग्रेस और झामुमो के इन हमलों पर भाजपा ने तुरंत और तीखा पलटवार किया। भाजपा नेतृत्व ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और हताशा में उठाया गया कदम करार दिया। चूंकि नामांकन को होल्ड पर रखा गया था, इसलिए परिमल नथवाणी को अपना पक्ष रखने के लिए तय समय सीमा दी गई थी। नथवाणी ने चुनाव अधिकारी के समक्ष अपने पक्ष में सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए। बिंदुवार तरीके से विसंगतियों पर अपना लिखित स्पष्टीकरण दिया।

रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला

नथवाणी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और दस्तावेजों की गहन जांच के बाद अंततः चुनाव अधिकारी संतुष्ट नजर आए और उन्होंने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए उनके नामांकन को वैध घोषित कर मंजूर कर लिया। जैसे ही नामांकन को लेकर अंदर स्क्रूटनी (जांच) चल रही थी, बाहर का माहौल बेहद गरमा गया। विधानसभा परिसर के बाहर बड़ी संख्या में भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन हुआ। कुछ समय के लिए स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि सुरक्षा बलों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

सीटों का समीकरण : अब मुकाबला हुआ 'त्रिकोणीय'

झारखंड से राज्यसभा की दो सीटें खाली हुई हैं। पहली सीट झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के कारण और दूसरी सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने की वजह से खाली हुई है। इन दो सीटों पर अब मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो चुका है। मैदान में अब दो सीटों पर तीन दिग्गज मैदान में हैं। इनमें बैद्यनाथ राम (झामुमो), प्रणव झा (कांग्रेस) और एनडीए समर्थित परिमल नथवाणी शामिल हैं। 
 
भले ही कांग्रेस नथवाणी को 'बाहरी' बताकर घेर रही हो, लेकिन झारखंड की राजनीति के लिए परिमल नथवाणी कोई नया नाम नहीं हैं। वे इससे पहले भी 2008 से 2020 तक लगातार दो बार (12 वर्षों तक) झारखंड से ही राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। नथवाणी का नामांकन मंजूर होने के बाद अब गेंद विधायकों के पाले में है। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
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