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पूर्वी DRC में इबोला संकट गहराया, मामले बढ़कर हुए 515, UN अधिकारी का इतूरी दौरा
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ मानवीय सहायता अधिकारी, इबोला प्रकोप के केंद्र इतूरी प्रांत के 3 दिवसीय आकलन दौरे पर हैं। इस बीच, पूर्वी डीआरसी के 3 प्रांतों में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 515 हो गई है।
डीआरसी में संयुक्त राष्ट्र के अंतरिम मानवीय समन्वयक डेमियन ममा, रविवार को इतूरी प्रांत की राजधानी बुनिया पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान वे इबोला से निपटने के प्रयासों का आकलन करेंगे और इस घातक प्रकोप को समाप्त करने के लिए सरकार के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान के समर्थन में समन्वय प्रयासों को मज़बूत करेंगे।
बढ़ते मामले
तेज़ी से फैल रहा यह प्रकोप (जो पड़ोसी देश युगांडा तक पहुंच चुका है) इबोला वायरस के दुर्लभ 'बुंडिबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन के कारण हुआ है। इसके लिए अभी कोई स्वीकृत उपचार या टीका उपलब्ध नहीं है, हालांकि तीन संभावित टीकों पर काम चल रहा है।
शनिवार को कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों ने 27 नए पुष्ट मामलों की जानकारी दी। इसके बाद इतूरी, उत्तरी कीवू और दक्षिणी कीवू प्रांतों में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 515 हो गई है। अब तक 91 लोगों की मौत हो चुकी है। लगभग 95% मामले इतूरी प्रांत में हैं और अब तक 12 लोग स्वस्थ हुए हैं।
इस बीच, युगांडा ने 19 पुष्ट मामलों की सूचना दी है, जिनमें दो मौतें शामिल हैं। इसके अलावा, एक सम्भावित मामला भी दर्ज किया गया है, जिसमें व्यक्ति की मौत हो गई।
अहम चुनौतियां
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के उप-प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने कहा कि डीआरसी में इबोला से निपटने के प्रयासों में मामलों का प्रबन्धन, उपचार केन्द्रों का संचालन, आवश्यक दवाओं एवं आपूर्ति सामग्री की उपलब्धता, सामुदायिक भागेदारी, जोखिम संचार और निगरानी को मज़बूत करना शामिल है।
हालांकि उन्होंने कहा कि प्रतिक्रिया प्रयासों के सामने अब भी बड़ी चुनौतियां हैं, जिनमें संपर्कों की पहचान में कमियां, सीमित उपचार क्षमता और आवश्यक दवाओं की कमी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मामलों का समय पर पता लगाने और पुष्टि के लिए प्रयोगशाला क्षमता बढ़ाना बेहद ज़रूरी है।
यह स्वास्थ्य संकट डीआरसी में पहले से गम्भीर मानवीय स्थिति के बीच सामने आया है, जहां पहले ही देशभर में लगभग 1 करोड़ 50 लाख लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है।
इसके अलावा, देश के आधे से अधिक विस्थापित लोग (यानी लगभग 34 लाख लोग) उन इलाक़ों में रह रहे हैं जो इस प्रकोप से प्रभावित हैं। इससे राहत एवं स्वास्थ्य कार्रवाई और कठिन हो गई है।
महाद्वीपीय कार्रवाई योजना
कांगो के अधिकारियों ने 15 मई को इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की थी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया, हालांकि इसे महामारी का ख़तरा नहीं माना गया।
इसके लक्षणों में अचानक तेज़ बुख़ार, सिरदर्द, कमज़ोरी, उल्टी और दस्त शामिल हैं। यह 17वीं बार है जब डीआरसी इबोला का सामना कर रहा है। इस संकट के बाद पूरे अफ़्रीकी महाद्वीप में समन्वित जवाबी कार्रवाई शुरू की गई है।
पिछले सप्ताह WHO ने अफ़्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्रों (Africa CDC) और साझीदारों के साथ मिलकर 51 करोड़ 80 लाख डॉलर जुटाने की योजना शुरू की। इसका उद्देश्य अफ़्रीकी देशों को तैयारी, मामलों की तेज़ पहचान तथा प्रभावी प्रतिक्रिया में मदद देना है।
ज़ाम्बिया को सहायता
संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ज़ाम्बिया के अधिकारियों को इबोला से निपटने की तैयारी के लिए अहम उपकरण और सामग्री सौंपी है। इनमें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE), प्रयोगशाला में इस्तेमाल होने वाले रसायन, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण से जुड़ी सामग्री तथा नमूनों को सुरक्षित रूप से ले जाने की आपूर्ति शामिल है।
एजेंसी ने कहा, हालांकि ज़ाम्बिया में अब तक इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन प्रभावित देशों के निकट होने और सीमा पार आवाजाही अधिक होने के कारण वहां जोखिम की संभावना बनी हुई है। WHO ने ज़ोर दिया है कि इबोला से बचाव की पहली पंक्ति के रूप में तैयारी बेहद ज़रूरी है। संगठन ने यह भी कहा कि समुदायों की भागेदारी और लक्षणों की समय पर सूचना देना लोगों की जान बचाने के लिए बेहद अहम है।
