Iran-Israel-US War : ईरान में पिछले कुछ हफ़्तों से इसराइली और अमेरिकी सैन्य बलों की हवाई बमबारी की वजह से राजधानी तेहरान, इसफ़हान, कर्मनशाह समेत देश के 20 प्रान्त प्रभावित हुए हैं। यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) के अनुसार, हिंसा में 1,200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, 17 हज़ार से अधिक घायल हुए हैं, बड़े पैमाने पर इमारतों, घरों, स्कूलों, स्वास्थ्य केन्द्रों, और सांस्कृतिक स्थलों समेत बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंची है और 32 लाख लोगों के विस्थापित होने का अनुमान है। 28 फरवरी को इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए थे, जिससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में व्यापक संकट उपजा है।
ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में स्थित देशों को निशाना बनाकर मिसाइल व ड्रोन हमले किए हैं, जबकि लेबनान में हिज़बुल्लाह और इसराइली बलों के बीच टकराव बड़ी संख्या में लोगों के हताहत व विस्थापित होने की वजह बना है। आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) ने 28 फ़रवरी से 17 मार्च के दौरान, ईरान में मानवीय स्थिति पर जानकारी जुटाई है।
अहम तथ्य
ईरान के विभिन्न शहरों में घरों, स्कूलों, स्वास्थ्य केन्द्रों और सांस्कृतिक स्थलों को भारी नुक़सान पहुंचा है, जबकि तेल प्रतिष्ठानों, रिफ़ाइनरी, जल शोधन संयंत्रों और अहम बुनियादी ढांचों के क्षतिग्रस्त होने से अति आवश्यक सेवाओं में व्यवधान आया है।
तेल भंडारों पर बमबारी से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक धुंए के बादलों से नई चिन्ताएं उपजी हैं और जल स्रोतों के दूषित होने की भी आशंका है। सार्वजनिक स्वास्थ्य व मूलभूत सेवाओं पर भीषण दबाव है। भीषण हमलों में 1,200 से अधिक लोग मारे गए हैं, 17 हज़ार घायल हैं, जिनमें बच्चे व स्वास्थ्यकर्मी भी हैं। 25 लाख लोग हिंसक टकराव की चपेट वाले इलाक़ों में हैं और 54 हज़ार घरों, स्कूलों, इमारतों, स्वास्थ्य केन्द्रों, सांस्कृतिक स्थलों व अन्य नागरिक प्रतिष्ठानों को क्षति पहुंची है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 15 मार्च तक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर 18 हमलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 8 लोगों की जान गई है। आपात उपचार और मनोसामाजिक समर्थन सेवाओं की मांग में उछाल दर्ज किया गया है। युद्ध की वजह से आम लोगों की आजीविका, स्थानीय व्यवसायों के कामकाज में अवरोध उपजे हैं।
आम नागरिक व समुदाय तनाव व बेचैनी से जूझ रहे हैं और अग्रिम पांत के राहतकर्मी चुनौतियों के बावजूद काम में जुटे हैं। हमलों से बचने के लिए ईरानी नागरिक बड़े शहरी इलाक़ों से सुरक्षित आश्रय की तलाश में जा रहे हैं और अब तक 32 लाख लोगों के अपने घर छोड़कर जाने का अनुमान है।
आवश्यक सेवाओं पर असर
कुछ इलाक़ों में अति आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता पर असर हुआ है। 7 मार्च को हुए हमलों के बाद क़ेश्म द्वीप पर स्थित 25 से अधिक गांवों में जल की आपूर्ति ठप हो गई थी, चूंकि जल शोधन प्लांट को नुक़सान पहुंचा था। वहीं तेहरान और अन्य बड़े शहरों में बिजली आपूर्ति नेटवर्क को भी क्षति पहुंचने से कटौती होने की जानकारी है। कुछ इलाक़ों में जल की क़िल्लत महसूस की जा रही है और ट्रकों के ज़रिए आपात आपूर्ति की गई है।
ईरान में 7 मार्च को तेल रिफ़ाइनरी प्लांट पर हमले हुए थे और केवल राजधानी तेहरान में ही 4 को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद उनमें आग भड़क गई थी। इसके बाद तेहरान के आसमान में घनघोर धुंआ छा गया था, जिसके बाद सरकार ने ज़हरीली, अम्लीय बारिश की चेतावनी जारी करते हुए लोगों से अपने घरों में ही रहने की अपील की थी।
ईरान के सांस्कृतिक धरोहर मंत्रालय के अनुसार, हवाई हमलों में कम से कम 56 सांस्कृतिक विरासत स्थल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें तेहरान के गुलिस्तां पैलेस समेत अन्य कई बड़े स्थल, इसफ़हान शहर में यूनेस्को द्वारा सूचीबद्ध इलाक़े, कुर्दिस्तान में धरोहर इमारतें समेत अन्य स्थान हैं।
ईरान में 16 लाख से अधिक शरणार्थियों ने शरण ली हुई है, जिनमें अधिकांश अफ़ग़ान नागरिक हैं। उनमें से बहुत से लोगों के लिए स्थिति नाज़ुक है और समर्थन के लिए सीमित नेटवर्क है। 28 फरवरी के बाद से अब तक 24 हज़ार से अधिक अफ़ग़ान, ईरान से अपने देश लौट चुके हैं।