शुक्रवार, 13 मार्च 2026
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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शुक्रवार, 13 मार्च 2026 (16:49 IST)

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध क्यों छिड़ा? जानिए इसके पीछे की 5 बड़ी वजह

iran israel war
iran israel yudh kyu ho raha hai: 13 जून 2025 को इजरायल ने 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' के जरिए ईरान के परमाणु ठिकानों और शीर्ष सैन्य कमांडरों पर भीषण हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायली शहरों पर भारी बमबारी की, जिसे अंततः अमेरिकी हस्तक्षेप और ईरान की परमाणु साइट्स पर बम गिराने के बाद युद्ध विराम के जरिए रोका गया। हालांकि, शांति अधिक समय तक नहीं टिकी। ठीक आठ महीने बाद, 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर फिर से हमला बोल दिया। इजरायल ने इस सैन्य अभियान को 'ऑपरेशन रोयरिंग लॉयन जुडाया' और अमेरिका ने इसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया है। इसके विपरीत, ईरान ने अपने जवाबी अभियान को 'फतह-ए-खैबर' का नाम देकर जंग का ऐलान कर दिया है।
 

1. परमाणु कार्यक्रम का खतरा:

इजरायल के लिए ईरान का परमाणु कार्यक्रम उसके अस्तित्व से जुड़ा संकट है। इजरायल को डर है कि परमाणु संपन्न ईरान उसके विनाश की धमकियों को हकीकत में बदल सकता है, जबकि ईरान स्पष्ट रूप से इजरायल के अस्तित्व को मिटाने की बात करता रहा है।
 

2. हमास और हिज़्बुल्लाह का समर्थन:

ईरान द्वारा हमास (गाजा) और हिज़्बुल्लाह (लेबनान) जैसे संगठनों को पैसा, हथियार और ट्रेनिंग दी जाती है। जहाँ ईरान इन्हें "प्रतिरोध" की ताकत मानता है, वहीं इजरायल इन्हें ईरानी 'प्रॉक्सी' और अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा आतंकी खतरा मानता है।
 

3. क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई:

दोनों देश मध्य-पूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं। सीरिया, लेबनान और इराक जैसे देशों में ईरान की बढ़ती सैन्य मौजूदगी से इजरायल सशंकित है। उसे डर है कि ईरान उसकी सीमाओं के पास सैन्य अड्डे बना रहा है, जिसके कारण वह अक्सर सीरिया में ईरानी ठिकानों पर हमले करता है।
 

4. धार्मिक और वैचारिक टकराव:

यह संघर्ष शिया इस्लामी सिद्धांतों द्वारा शासित ईरान और यहूदी राज्य इजरायल के बीच गहरे वैचारिक विभाजन का भी परिणाम है। ईरान इजरायल को एक अवैध राष्ट्र मानता है, जिससे दोनों के बीच किसी भी कूटनीतिक समाधान की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
 

5. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 

यरूशलेम का धार्मिक विवाद: यरूशलेम तीनों धर्मों- इस्लाम, यहूदी और ईसाई के लिए अत्यंत पवित्र है। यहाँ मुस्लिमों की अल-अक्सा मस्जिद और यहूदियों का पवित्र प्रार्थना स्थल एक ही परिसर में हैं। ईसाइयों के लिए भी यह ईसा मसीह से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। इस स्थल पर अधिकार को लेकर मध्यकाल से ही तीनों धर्मों के बीच युद्ध और विवाद चलता आ रहा है।
 
इजरायल की स्थापना और 'नकबा': 1948 में फिलिस्तीन का विभाजन कर इजरायल देश बनाया गया। इसके कारण लगभग 7 लाख फिलिस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा। इस सामूहिक विस्थापन को फिलिस्तीनी 'नकबा' (महाविनाश) कहते हैं। 15 मई का दिन आज भी मुस्लिम जगत में इस दुखद घटना की याद में मनाया जाता है।
 
मान्यता का अभाव और ईरानी क्रांति: शुरुआत में अधिकांश मुस्लिम देशों ने इजरायल को मान्यता नहीं दी। 1979 की ईरानी क्रांति ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। क्रांति से पहले ईरान और इजरायल सहयोगी थे, लेकिन ईरान के 'इस्लामी गणराज्य' बनने के बाद वह इजरायल का कट्टर दुश्मन बन गया। इस बदलाव ने दोनों देशों के बीच ऐसी खाई पैदा की जो आज भी युद्ध का मुख्य कारण है।